पूर्व DIG ITBP एवं पर्वतारोही शिव प्रसाद चमोली को प्रतिष्ठित ‘Tenzing Norgay लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार

84 की उम्र, अटूट जज्बा : अर्जुन पुरस्कार के समकक्ष माने जाने वाले इस देश के सर्वोच्च साहसिक सम्मान के तहत उन्हें प्रशस्ति पत्र, सम्मान वस्त्र और 15 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। मसूरी के केम्पटी फॉल स्थित हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट के संस्थापक चमोली के नाम ऐसे अनेक विश्व कीर्तिमान दर्ज हैं, जिन्होंने भारतीय साहसिक खेलों के इतिहास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया…

ममता सिंह  

नई दिल्ली/ देहरादून/मसूरी। पूर्व डीआईजी आईटीबीपी, जाने-माने पर्वतारोही एवं हिमालय साहसिक संस्थान कैम्पटी फाॅल, मसूरी के संस्थापक-निदेशक शिव प्रसाद चमोली को तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड (Lifetime Achievement) के लिए चुना गया है। यह सम्मान चमोली के छह दशकों से अधिक के अथक योगदान को देश की सर्वोच्च खेल उपलब्धियों में शामिल करता है, जो न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे उत्तराखंड और हिमालयन एडवेंचर समुदाय के लिए बेहद गर्व का क्षण है।

‘यमुना घाटी के गौरव’ के रूप में पहचाने जाने वाले 84 वर्षीय शिव प्रसाद चमोली को भारत सरकार के खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय ने साहसिक एवं शीतकालीन खेलों में छह दशकों से अधिक के अथक योगदान को देखते हुए प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना है। वे उत्तराखंड विंटर गेम्स एसोसिएशन (Uttarakhand Winter Games Association) से भी जुड़े रहे हैं और शीतकालीन खेलों एवं साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में उनका योगदान अतुलनीय रहा है। मालूम हो कि अर्जुन पुरस्कार (Arjun Award) के समकक्ष माने जाने वाले इस देश के सर्वोच्च साहसिक सम्मान के तहत प्रशस्ति पत्र, सम्मान वस्त्र और 15 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है।

साहसिक अभियानों के शिखर पुरुष : 84 वर्ष की आयु में भी युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण…| Pic Credit : Social Media
साहसिक अभियानों के शिखर पुरुष : 84 वर्ष की आयु में भी युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण…| Pic Credit : Social Media

1942 में जन्मे शिव प्रसाद चमोली का साहसिक अभियानों से रिश्ता एक युवा सेना अधिकारी के रूप में शुरू हुआ था। इसके बाद इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) में अपनी विशिष्ट सेवाओं के दौरान उन्होंने न केवल देश की सीमाओं की सुरक्षा की, बल्कि पर्वतारोहण, स्कीइंग और रिवर राफ्टिंग के क्षेत्र में नए आयाम गढ़े। वे एक उत्कृष्ट पर्वतारोही होने के साथ-साथ कुशल स्कीयर, राफ्टिंग विशेषज्ञ और युवाओं के लिए एक प्रभावशाली प्रेरक वक्ता के रूप में जाने जाते हैं।  

साहसिक खेलों के क्षेत्र में चमोली का योगदान केवल अपनी व्यक्तिगत सफलताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने भावी पीढ़ियों को तराशने का काम भी पूरी निष्ठा से किया। जी हां, सेवानिवृत्ति के बाद 1994 में उन्होंने मसूरी के कैम्पटी फॉल में Himalayan Adventure Institute (HAI) की नींव रखी। उनके इंस्टीट्यूट के नाम ऐसे अनेक विश्व कीर्तिमान दर्ज हैं, जिन्होंने भारतीय साहसिक खेलों के इतिहास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

मसूरी के केम्पटी फॉल स्थित हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट (HAI) के संस्थापक एसपी चमोली ने पर्वतारोहण, स्कीइंग और रिवर राफ्टिंग में बनाए अनेक अभूतपूर्व विश्व कीर्तिमान…| Pic Credit : Social Media
मसूरी के केम्पटी फॉल स्थित हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट (HAI) के संस्थापक एसपी चमोली ने पर्वतारोहण, स्कीइंग और रिवर राफ्टिंग में बनाए अनेक अभूतपूर्व विश्व कीर्तिमान…| Pic Credit : Social Media

उनकी दूरदर्शिता और जुनून का ही परिणाम है कि उन्होंने भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन की राष्ट्रीय स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग समिति के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में देश भर में इस खेल को घर-घर तक पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभाई। इसके अलावा एक प्रखर लेखक के रूप में उन्होंने अपने ऐतिहासिक अभियानों को किताबों के जरिए आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजने का महत्वपूर्ण काम भी किया है।

आज 84 वर्ष की परिपक्व उम्र में भी उनका हौसला और ऊर्जा किसी नौजवान से कम नहीं है। वे इस उम्र में भी संस्थान के माध्यम से युवाओं को पर्वतारोहण, स्कीइंग, रिवर राफ्टिंग और आपदा प्रबंधन की बारीकियों से रूबरू करा रहे हैं। जीवन के आठ दशक पार करने के बाद भी एक सुरक्षित, सजग और साहसी भारत के निर्माण के लिए उनका यह निरंतर प्रयास वाकई प्रेरणादायी है।

एसपी चमोली की प्रमुख उपलब्धियां

  • नीलकंठ पर तिरंगा: 1974 में अत्यंत दुर्गम नीलकंठ शिखर पर सफल आरोहण का नेतृत्व किया।
  • ऐतिहासिक स्कीइंग अभियान: 1978 में केदार डोम पर भारत के प्रथम सफल स्कीइंग अभियान के उप-नेता रहे।
  • विश्व पुलिस खेल नेतृत्व: 1989 में इटली शीतकालीन खेलों में भारतीय पुलिस दल के कप्तान बने।
  • ग्रेट हिमालयन ट्रैवर्स: 1981 में कंचनजंगा से काराकोरम तक 5,000 किमी का विश्व रिकॉर्ड बनाया।
  • सासेर कांगड़ी पर विजय: 1986 में सासेर कांगड़ी-III शिखर पर पहला सफल आरोहण दर्ज किया।
  • श्योक नदी राफ्टिंग: 1986 में श्योक नदी में 105 किमी की चुनौतीपूर्ण राफ्टिंग यात्रा की।
  • ब्रह्मपुत्र राफ्टिंग रिकॉर्ड: 1991 में त्सांगपो से ब्रह्मपुत्र तक 1,100 किमी राफ्टिंग का रिकॉर्ड बनाया।
  • स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग के जनक: देश में स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग को लोकप्रिय बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
  • वैश्विक पहचान: रॉयल जियोग्राफिकल सोसाइटी के फेलो और दो चर्चित पुस्तकों के लेखक हैं।
  • युवाओं को प्रशिक्षण: अपने संस्थान से 21,000 से अधिक युवाओं को साहसिक प्रशिक्षण दिया।
  • आपदा प्रबंधन योगदान: 1,420 से अधिक खोज एवं बचाव कर्मियों को पर्वतीय राहत कार्य सिखाया।
  • सर्वोच्च सम्मान: साहसिक खेलों में जीवनपर्यंत योगदान के लिए Tenzing Norgay पुरस्कार…

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