SCO में चीन के BRI पर भारत का फिर ‘नो’, आखिर क्यों कायम है विरोध?

 किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भारत ने चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को लेकर अपना पुराना रुख कायम रखा। भारत ने BRI के समर्थन वाले घोषणापत्र के पैराग्राफ से दूरी बनाई। 2018 में SCO का पूर्ण सदस्य बनने के बाद से भारत हर शिखर सम्मेलन में इसी नीति पर कायम रहा है।

भारत की मुख्य आपत्ति BRI के तहत बनने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर है। CPEC पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है। भारत इस क्षेत्र को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और वहां किसी तीसरे देश की परियोजना को अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है।

बिश्केक घोषणापत्र में बेलारूस, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने BRI तथा यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच सहयोग और तालमेल के समर्थन को दोहराया। हालांकि, भारत ने इस पहल का समर्थन नहीं किया।

सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनेक्टिविटी के मुद्दे पर भारत की नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि संपर्क परियोजनाओं में देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। भारत का मानना है कि ऐसी कनेक्टिविटी, जो संप्रभुता की अनदेखी करे, भरोसा और सहयोग मजबूत करने के बजाय विवाद पैदा कर सकती है।

SCO के आर्थिक एजेंडे को लेकर भी भारत की अलग राय सामने आई। वर्ष 2023 में नई दिल्ली ने SCO इकोनॉमिक डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी 2030 से दूरी बनाई थी। इस बार भी घोषणापत्र में सदस्य देशों द्वारा वर्ष 2030 तक इस रणनीति को लागू करने की बात कही गई है, लेकिन भारत की आपत्तियों को देखते हुए इस मुद्दे पर मतभेद बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की अपील भी की। वहीं, SCO घोषणापत्र में ईरान पर हुए सैन्य हमलों की निंदा करते हुए राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया गया। घोषणापत्र में हालांकि इजराइल और अमेरिका का नाम नहीं लिया गया।

चीन का BRI एशिया, यूरोप और अफ्रीका को सड़क, रेल और जलमार्ग से जोड़ने वाली व्यापक बुनियादी ढांचा परियोजना है। भारत की आपत्ति विशेष रूप से CPEC और PoK से जुड़े संप्रभुता संबंधी मुद्दे पर है। यही वजह है कि SCO में भी नई दिल्ली ने BRI को समर्थन देने से दूरी बनाए रखी।

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