कुश कल्याण बुग्याल की खूबसूरती पर हर कोई फिदा, फिर भी विकास से क्यों दूर?

उत्तरकाशी जनपद धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांचक पर्यटन स्थलों के लिए भी खास पहचान रखता है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के अलावा जिले में कई ऐसे बुग्याल और प्राकृतिक स्थल हैं, जो अपनी खूबसूरती से पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। इन्हीं में करीब चार हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित कुश कल्याण बुग्याल भी शामिल है।

कुश कल्याण बुग्याल विशाल भूभाग में फैला हुआ है। यहां मखमली घास के मैदान, रंग-बिरंगे सुगंधित फूल, दुर्लभ जड़ी-बूटियां, ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं और बर्फ से ढकी चोटियां पर्यटकों को रोमांचित करती हैं। जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से करीब 30 किलोमीटर दूर सिल्ला गांव से होकर यहां पहुंचने वाला ट्रैक प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पांडव इसी हिमालयी क्षेत्र से होकर स्वर्गारोहण की यात्रा पर आगे बढ़े थे।

कुश कल्याण बुग्याल को पर्यटन के नक्शे पर पहचान दिलाने के लिए सिल्ला, जड़ाव और भेला टिपरी गांवों के ग्रामीण पिछले कई वर्षों से पर्यटन विकास मेले का आयोजन कर रहे हैं। इस वर्ष भी मेले का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों के साथ प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों ने भाग लिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं होने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से अब तक इसके विकास के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है। पर्याप्त सुविधाओं और प्रचार-प्रसार के अभाव में यह खूबसूरत स्थल अभी भी पर्यटकों और ट्रेकिंग के शौकीनों की पहुंच से काफी दूर है।

ग्रामीणों का कहना है कि उत्तरकाशी में दयारा बुग्याल की तरह अन्य कई बुग्याल भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित किए जा सकते हैं। हाल में स्याबा गांव में बेलक जौराई बुग्याल मेले के दौरान जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्थानीय युवाओं को होम स्टे से जोड़ने के लिए प्रेरित किया और इच्छुक युवाओं की सूची मांगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन विकास की उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों ने कुश कल्याण बुग्याल को विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की है।

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