देहरादून। उत्तराखंड में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार की पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में प्रदेश के 95 विकासखंडों में स्वयं सहायता समूहों की ओर से 4,480 स्टॉल लगाए गए, जहां करीब 12.50 करोड़ रुपये के स्थानीय उत्पादों की बिक्री हुई। वहीं प्रदेश की 3 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने में सफल रही हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ के तहत उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का शुभारंभ किया और उनका अवलोकन किया। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार राखियों और विभिन्न स्थानीय उत्पादों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों से वर्चुअल माध्यम से जुड़ी महिलाओं से भी संवाद किया।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले वर्ष से ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव’ रक्षाबंधन से 15 दिन पहले शुरू किया जाएगा और इसे पूरे पखवाड़े तक आयोजित किया जाएगा। इससे महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए अधिक समय और बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। सरकार का मानना है कि इससे उनकी आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम से जुड़ी महिलाओं ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की पहल से उन्हें रोजगार और आय के नए अवसर मिल रहे हैं। उनके उत्पादों को बाजार के साथ पहचान भी मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों से स्टॉलों से खरीदारी कर महिला समूहों को प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना ही ‘वोकल फॉर लोकल’ की वास्तविक भावना है। इससे महिलाओं के हुनर को सम्मान मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं खेती, पशुपालन और अन्य आजीविका गतिविधियों के साथ अब उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ शुरू की थी, ताकि महिलाओं के स्थानीय उत्पादों को गांव से बाहर व्यापक बाजार और उचित मूल्य मिल सके। वर्तमान में प्रदेश में 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 5.20 लाख से अधिक ग्रामीण परिवार जुड़े हैं। इनके सहयोग के लिए 8 हजार से अधिक ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन भी कार्य कर रहे हैं।