देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड में सड़क कनेक्टिविटी और बाढ़ सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने केंद्र के सामने कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे हैं। नई दिल्ली के ट्रांसपोर्ट भवन स्थित सागर मंथन सभागार में गुरुवार को प्रमुख नदियों की वैज्ञानिक तरीके से ड्रेजिंग और बाढ़ सुरक्षा उपायों को लेकर हुई बैठक में उन्होंने राज्य की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे उठाए।
बैठक में व्यास, रावी, भागीरथी, अलकनंदा और तीस्ता समेत प्रमुख नदियों में वैज्ञानिक ढंग से ड्रेजिंग तथा बाढ़ से बचाव के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई। उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तरकाशी से गंगोत्री के बीच करीब 100 किलोमीटर का क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील है।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में नदी तल में बड़ी मात्रा में बोल्डर और मलबा जमा होने से नदी का स्तर ऊंचा हो सकता है। कई परिस्थितियों में नदी के प्रवाह में रुकावट के कारण झील जैसी स्थिति बनने की आशंका भी रहती है। ऐसे में नदी किनारे बने राष्ट्रीय राजमार्ग की ऊंचाई बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए।
600 मीटर सड़क को ऊंचा करने का सुझाव
सतपाल महाराज ने हर्षिल के निकट बनी कृत्रिम झील का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-34 की सुरक्षा के लिए वहां 200 मीटर लंबा बांध बनाया गया है। इसके बावजूद करीब 600 मीटर हिस्से में सड़क को एक से डेढ़ मीटर तक ऊंचा किए जाने की आवश्यकता है, ताकि संभावित बाढ़ या जलस्तर बढ़ने की स्थिति में हाईवे सुरक्षित रह सके।
बैठक के दौरान महाराज ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भी सौंपा। इसमें उन्होंने उत्तराखंड की प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर, बागेश्वर-कर्णप्रयाग और ऋषिकेश-उत्तरकाशी रेल परियोजनाओं में बनने वाली एस्केप टनल को भविष्य में सड़क यातायात के लिए भी उपयोगी बनाने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि रेल मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से इन टनलों को कम से कम दो लेन के मोटर वाहन यातायात के अनुरूप विकसित करने का प्रावधान किया जा सकता है।
इसके अलावा महाराज ने तिलवाड़ा-मायली-गुप्तकाशी मोटर मार्ग को सुपर मार्ग के रूप में दो लेन में विकसित करने का अनुरोध भी किया। उनके अनुसार इससे क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।