नई दिल्ली: जातिगत जनगणना को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस ओबीसी विभाग के अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने सोमवार को आरोप लगाया कि सरकार ने जातिगत जनगणना की घोषणा तो कर दी, लेकिन इसकी प्रश्नावली में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के लिए अलग से जरूरी कॉलम नहीं रखा है। उन्होंने दावा किया कि 14 अगस्त को जारी प्रश्नावली में ओबीसी श्रेणी के बजाय केवल ‘कास्ट’ का उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में जयहिंद ने कहा कि ओबीसी एक संवैधानिक वर्ग है और उसकी वास्तविक स्थिति तथा संख्या का सही आकलन तभी संभव है, जब जनगणना की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो। उन्होंने सरकार से प्रश्नावली में ओबीसी से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट करने की मांग की।
जयहिंद ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी वर्ष 2023 से लगातार जातिगत जनगणना की मांग उठाते रहे हैं। उनके मुताबिक, लंबे राजनीतिक दबाव के बाद केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की थी। अब कांग्रेस का आरोप है कि प्रश्नावली को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कांग्रेस नेता ने तेलंगाना में हुए जाति सर्वे का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सर्वे के लिए 54 सवालों वाली विस्तृत प्रश्नावली तैयार की गई थी। उनके अनुसार, गणनाकर्मियों के पास 242 जातियों की जाति पुस्तिका और केंद्रीय जाति सूची भी उपलब्ध थी, जिसके आधार पर घर-घर जाकर जानकारी जुटाई गई।
जयहिंद ने पिछड़े वर्गों की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने लाने के लिए रोहिणी आयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग के सामाजिक और आर्थिक हितों से जुड़े फैसलों के लिए उसकी वास्तविक संख्या और स्थिति की जानकारी बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की सिफारिशों को अब तक अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि ओबीसी समाज अपने अधिकारों को लेकर जागरूक है और जातिगत जनगणना की मांग आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने दावा किया कि सरकार चाहे जो कदम उठाए, देश में पारदर्शी और सही जातिगत जनगणना की मांग से पीछे नहीं हटा जाएगा।