हरिद्वार। कांवड़ यात्रा के दौरान इस बार हरिद्वार में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि करीब 4.8 करोड़ श्रद्धालुओं ने यात्रा पूरी की। अंतिम दो दिनों में ही एक करोड़ से अधिक कांवड़िए हरिद्वार पहुंचे। यात्रा के दौरान हर तरफ भगवान शिव के जयकारे सुनाई दिए और पूरा शहर भक्ति के रंग में डूबा रहा। लेकिन श्रद्धालुओं की वापसी के बाद अब प्रशासन के सामने शहर को साफ-सुथरा करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
कांवड़ यात्रा समाप्त होने के बाद गंगा घाटों, पार्किंग स्थलों और कांवड़ शिविरों में भारी मात्रा में कूड़ा जमा हो गया है। प्रशासन के मुताबिक पिछले करीब दो सप्ताह में हरिद्वार में लगभग 7,000 मीट्रिक टन कचरा इकट्ठा हुआ। इसमें पुराने कपड़े, जूते-चप्पल, प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथिन और खाने-पीने का बचा हुआ सामान बड़ी मात्रा में शामिल है। कई घाटों पर गंदगी के साथ दुर्गंध की समस्या भी सामने आई है।
कचरे की मात्रा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सामान्य दिनों में हरिद्वार में प्रतिदिन करीब 250 टन कचरे का निस्तारण किया जाता है। कांवड़ यात्रा के दौरान अचानक बढ़े कचरे ने नगर निगम की व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया।
स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने युद्धस्तर पर विशेष सफाई अभियान शुरू किया है। अभियान में एक हजार से अधिक सफाई कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं। कचरा हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि 89 से अधिक बड़े ट्रकों के जरिए कचरे को शहर से बाहर भेजा जा चुका है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कांवड़ यात्रा के स्वरूप में भी बदलाव आया है। बड़े वाहनों, तेज आवाज वाले डीजे और बढ़ती भीड़ के कारण यात्रा के दौरान कचरा और अव्यवस्था भी बढ़ी है।
अधिकारियों का कहना है कि सुभाष घाट, नई घाट, अलकनंदा घाट और विष्णु घाट समेत कई प्रमुख स्थानों की सफाई करीब 95 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी है। प्रशासन का लक्ष्य जल्द से जल्द पूरे हरिद्वार को साफ करना है, ताकि स्थानीय लोगों और पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो।