रियाद। लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर सऊदी अरब ने बड़ी पहल शुरू की है। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से जहाजों को लगातार निशाना बनाए जाने के बीच सऊदी अरब एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री गठबंधन तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस पहल का मकसद लाल सागर में समुद्री यातायात को सुरक्षित रखना और व्यापारिक जहाजों को संभावित हमलों से बचाना है।
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, प्रस्तावित समुद्री गठबंधन को अब तक 14 देशों का समर्थन मिल चुका है। इनमें तुर्किये, पाकिस्तान, मिस्र, सूडान और जिबूती समेत कई देश शामिल हैं। सऊदी सरकार ने इस पहल में भागीदारी के लिए करीब 50 देशों को आमंत्रित किया है। माना जा रहा है कि गठबंधन के विस्तार के साथ लाल सागर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।
सऊदी अधिकारियों के अनुसार, लाल सागर सिर्फ क्षेत्रीय समुद्री मार्ग नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग से बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, तेल आपूर्ति और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से हूती विद्रोहियों की ओर से लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। इन हमलों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को अपने मार्ग बदलने पड़े हैं, जिससे परिवहन लागत और यात्रा का समय बढ़ने जैसी चुनौतियां सामने आई हैं।
सऊदी अरब की नई पहल को क्षेत्रीय स्तर पर समुद्री सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रस्तावित गठबंधन के जरिए सदस्य देश समुद्री मार्गों की निगरानी, व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और संभावित खतरों से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि सऊदी अरब के इस प्रस्ताव को आने वाले समय में कितने देशों का समर्थन मिलता है। अगर बड़ी संख्या में देश गठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो लाल सागर में समुद्री सुरक्षा के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय तंत्र विकसित हो सकता है।