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20 घंटे बाद खत्म हुआ सितारगंज तहसील विवाद, आखिर क्यों खुला बंद पड़ा ताला?

सितारगंज। विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई के बाद उत्तराखंड के सितारगंज तहसील में उत्पन्न हुआ विवाद करीब 20 घंटे बाद समाप्त हो गया। लंबे समय तक चले गतिरोध और राजस्व कर्मचारियों के आंदोलन के बाद उच्च अधिकारियों एवं कर्मचारी संगठनों के बीच हुई वार्ता सफल रही। सहमति बनने के बाद कर्मचारियों ने अपना अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और धरना समाप्त कर दिया, जिसके साथ ही तहसील कार्यालय का मुख्य गेट खोल दिया गया और सरकारी कामकाज दोबारा सामान्य रूप से शुरू हो गया।

विवाद के दौरान तहसील परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। कर्मचारियों के विरोध के कारण विजिलेंस टीम लगभग 20 घंटे तक परिसर के अंदर ही मौजूद रही। वार्ता सफल होने और आंदोलन समाप्त होने के बाद कर्मचारियों ने विजिलेंस टीम को बाहर जाने दिया, जिसके बाद टीम सुरक्षित रूप से वहां से रवाना हो गई। पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए था।

इधर, राजस्व विभाग ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए एक प्रेस नोट जारी किया। विभाग का कहना है कि जिन दो कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस ने कार्रवाई की, वे रिश्वत नहीं ले रहे थे, बल्कि सरकार के बकाया राजस्व की वैधानिक वसूली कर रहे थे। विभाग के अनुसार संबंधित राशि रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) के अनुपालन में विभागीय केस काउंटर पर जमा कराई जा रही थी। विभाग का दावा है कि इस प्रक्रिया को गलत तरीके से रिश्वतखोरी मान लिया गया, जबकि पूरी वसूली राजस्व संहिता और निर्धारित सरकारी नियमों के अनुरूप की जा रही थी।

उधर, उपजिलाधिकारी तुषार सैनी ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विजिलेंस की कार्रवाई उचित थी या राजस्व विभाग का दावा सही है।

फिलहाल आंदोलन समाप्त होने के बाद तहसील में सामान्य कामकाज बहाल हो गया है, लेकिन पूरे मामले की जांच पूरी होने तक इस प्रकरण पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं।

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