बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। देश की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2013 में ढाका में हुई हिफाजत-ए-इस्लाम की रैली के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले में शेख हसीना समेत 40 लोगों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध के नए आरोपों पर संज्ञान लिया है। इस मामले को लेकर अदालत ने कई फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए हैं।
मुख्य अभियोजक अमीनुल इस्लाम के अनुसार, यह मामला 5 मई 2013 को राजधानी ढाका के मोतीझील स्थित शपला चत्तर में आयोजित हिफाजत-ए-इस्लाम की विशाल रैली से जुड़ा है। संगठन ने उस समय 13 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था, जिसमें ईशनिंदा कानून लागू करने और इस्लाम के अपमान पर कड़ी सजा देने की मांग प्रमुख थी। निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शनकारी वहां डटे रहे, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों ने रातभर अभियान चलाकर उन्हें हटाया था।
अभियोजन पक्ष का दावा है कि उस कार्रवाई के दौरान ढाका और चार अन्य जिलों में कुल 58 लोगों की मौत हुई थी। मानवाधिकार संगठन ‘अधिकार’ ने इस घटना को नरसंहार करार दिया था। हालांकि उस समय शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि झड़पों और भगदड़ में केवल 11 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। सरकार ने यह भी आरोप लगाया था कि मानवाधिकार संगठन की सूची में कई नाम गलत या काल्पनिक थे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने पूर्व सेना प्रमुख, कई वरिष्ठ राजनेताओं और सुरक्षा अधिकारियों समेत फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। वहीं, पूर्व मंत्रियों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और कुछ पत्रकारों सहित नौ हाई-प्रोफाइल आरोपी पहले से जेल में बंद हैं।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में सरकार के पतन के बाद शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं। इससे पहले विशेष ट्रिब्यूनल ने 2024 के छात्र आंदोलन को दबाने के मामले में उनकी गैरमौजूदगी में उन्हें मृत्युदंड भी सुनाया था। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने बाद में कानून में संशोधन कर पूर्व सरकार के नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराधों के मामलों की सुनवाई का रास्ता भी साफ किया।