केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने रेलवे में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल के डिप्टी चीफ सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर सत्यम कुमार को हावड़ा रेलवे स्टेशन पर चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इस मामले में कोलकाता की निजी कंपनी एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के दो प्रतिनिधियों को भी गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई की इस कार्रवाई से रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया है।
सीबीआई के मुताबिक, आरोपी अधिकारी पर आरोप है कि उसने एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची और चक्रधरपुर मंडल में चल रहे सिग्नल एवं दूरसंचार कार्यों से जुड़ी प्राइस वैरिएशन क्लॉज (पीवीसी) तथा कॉन्ट्रैक्ट वैरिएशन फाइलों को मंजूरी देने के बदले रिश्वत की मांग की। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की और ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी अधिकारी इसी मामले में मई महीने में पांच लाख रुपये की रिश्वत पहले ही ले चुका था। इसके बाद उसने बाकी रकम के रूप में चार लाख रुपये और मांगे थे। शिकायत की पुष्टि होने पर सीबीआई ने हावड़ा रेलवे स्टेशन पर जाल बिछाया और आरोपी अधिकारी को कंपनी के प्रतिनिधियों से चार लाख रुपये लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। मौके से पूरी रिश्वत की राशि बरामद कर जब्त कर ली गई।
गिरफ्तार आरोपितों में डिप्टी चीफ सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर सत्यम कुमार के अलावा एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के प्रतिनिधि सुब्रत चक्रवर्ती और राजू पंडित शामिल हैं। कार्रवाई के बाद सीबीआई ने पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार स्थित आरोपितों के घरों और कार्यालयों में तलाशी भी ली, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
सीबीआई ने बताया कि पश्चिम बंगाल में रिश्वतखोरी के मामले में कई वर्षों बाद यह उसका पहला ट्रैप ऑपरेशन है। सभी आरोपितों को सक्षम अदालत में पेश किया जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और सीबीआई इस पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।