महंगी कैंसर दवाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मरीज की मौत के बाद लिया बड़ा फैसला

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक दवाओं की ऊंची कीमतों और समय पर इलाज नहीं मिलने से एक मरीज की मौत के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे का स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लाखों मरीजों से जुड़ा है जो महंगी दवाओं का खर्च वहन नहीं कर पाते।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन भी शामिल हैं, ने कहा कि केरल हाईकोर्ट अपने समक्ष लंबित याचिका पर फैसला करेगा, जबकि सुप्रीम कोर्ट जीवनरक्षक दवाओं की कीमत, उनकी उपलब्धता और आम मरीजों की पहुंच जैसे व्यापक मुद्दों पर सुनवाई करेगा।

यह मामला ‘वर्किंग ग्रुप ऑन एक्सेस टू मेडिसीन्स एंड ट्रीटमेंट’ के संयोजकों द्वारा दिए गए प्रतिनिधित्व के आधार पर अदालत के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेटास्टैटिक ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित एक महिला की याचिका में हुई देरी पर भी चिंता जताई। महिला ने वर्ष 2022 में महंगी कैंसररोधी दवा रिबोसिक्लिब उपलब्ध कराने की मांग को लेकर केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

केंद्र सरकार ने उस समय पेटेंट अधिनियम की धारा 100 के तहत हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा था कि ऐसी परिस्थितियां राष्ट्रीय आपातकाल की श्रेणी में नहीं आतीं। हालांकि, हाईकोर्ट में कई बार सुनवाई सूचीबद्ध होने के बावजूद जून से सितंबर 2022 के बीच मामले का समय पर निस्तारण नहीं हो सका। इसी दौरान याचिकाकर्ता की मृत्यु हो गई।

अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से महंगी पेटेंट वाली दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने, उनकी उपलब्धता बढ़ाने और आम मरीजों तक उन्हें सुलभ बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर विस्तृत जवाब मांगा है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आने वाला फैसला भविष्य में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं को अधिक किफायती और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

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