महाराष्ट्र में एक बार फिर कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। खासकर पुणे में पिछले 10 दिनों के दौरान संक्रमण के मामलों में तेजी आई है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अधिकांश संक्रमितों में हल्के लक्षण पाए जा रहे हैं और किसी नई कोविड लहर के संकेत नहीं मिले हैं।
राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक महाराष्ट्र में कोविड-19 के कुल 48 मामले सामने आए हैं। राहत की बात यह है कि इनमें किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में तीन, फरवरी में एक, जून में 11 और जुलाई में अब तक 21 नए मामले दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस अब पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह इन्फ्लूएंजा की तरह समय-समय पर सामने आता रहेगा।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश मरीज नियमित कोविड जांच के दौरान नहीं, बल्कि किसी अन्य बीमारी की जांच या सर्जरी से पहले कराए गए प्री-ऑपरेटिव टेस्ट में संक्रमित पाए जा रहे हैं। संक्रामक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों की प्राकृतिक प्रतिरक्षा में कमी और वायरस के नए वेरिएंट के कारण हर एक-दो साल में मामलों में बढ़ोतरी होना सामान्य बात है।
डॉक्टरों के मुताबिक मौजूदा संक्रमण पहले के ओमिक्रॉन वेरिएंट से भी हल्का है। संक्रमित मरीजों में खांसी, जुकाम, गले में खराश, हल्का बुखार और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, जो आमतौर पर तीन से पांच दिनों में ठीक हो जाते हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वास्तविक संक्रमितों की संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि हल्के लक्षण वाले कई लोग कोविड जांच नहीं कराते।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि कोविड को अब सामान्य वायरल संक्रमण की तरह समझें, लेकिन सावधानी बरतना न छोड़ें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर स्वच्छता का ध्यान रखें और लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लें।
इस बीच आंध्र प्रदेश में भी 26 जून से 16 जुलाई के बीच कोविड के 12 मामले सामने आए हैं। इनमें चार मरीजों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग इन मामलों की निगरानी कर रहा है और वायरस के स्वरूप की जांच के लिए नमूने पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) भेजे गए हैं।