After Header-1

महिला आरक्षण बिल पर ऐपवा का बड़ा ऐलान, मॉनसून सत्र से पहले उठाई यह मांग

आगामी संसद के मॉनसून सत्र से पहले अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने महिला आरक्षण बिल-2023 को बिना किसी शर्त तत्काल लागू करने की मांग उठाई। इस मुद्दे को लेकर रुद्रपुर स्थित आहूजा धर्मशाला में आयोजित विचार गोष्ठी में महिला अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव श्वेता राज ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के बजाय तुरंत लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मौजूदा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को बिना किसी देरी के प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।

ऐपवा की प्रदेश संयोजक शिवानी पांडे ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लंबे संघर्ष के बाद मामले की सीबीआई जांच तो शुरू हुई, लेकिन छह महीने बाद भी जांच में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिला है।

बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की सदस्य अमनदीप कौर ने कहा कि महिलाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कानूनों, आयोगों और समितियों में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सेनेटरी पैड जैसे विषयों पर निर्णय लेने वाली समितियों में महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व होता, तो ऐसे उत्पादों को आवश्यक वस्तु के रूप में देखा जाता।

आम आदमी पार्टी की नेता किरण पांडे ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि महिला उत्पीड़न की घटनाओं में कमी लाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप ने आशा, आंगनबाड़ी और भोजनमाता जैसी महिला कर्मियों के आर्थिक शोषण का मुद्दा उठाया।

गोष्ठी के अंत में निर्णय लिया गया कि 20 जुलाई को महिला आरक्षण बिल-2023 को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर विभिन्न स्थानों पर ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.