चढ़ावा विवाद के बाद बीकेटीसी पर नए खुलासे, अब इन मामलों ने बढ़ाई मुश्किलें

गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब केवल एक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्यप्रणाली पर कई नए सवाल खड़े होने लगे हैं। चढ़ावा प्रकरण के अलावा दान में मिले वाहनों, कथित रूप से गायब लैपटॉप और वीआईपी दर्शन व्यवस्था जैसे मुद्दे भी चर्चा का विषय बन गए हैं। इससे मंदिर समिति की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।

चढ़ावा मामले में कार्रवाई करते हुए एक कर्मचारी को निलंबित किया गया है और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इसके साथ ही पुलिस भी पूरे मामले की अलग से जांच कर रही है। हालांकि अभी तक किसी भी जांच की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

इधर कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) और आम आदमी पार्टी लगातार इस मामले को लेकर सरकार और बीकेटीसी को घेर रहे हैं। विभिन्न जिलों में प्रदर्शन, पुतला दहन और निष्पक्ष जांच की मांग के जरिए विपक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहा है।

इसी बीच बीकेटीसी को विभिन्न बैंकों की ओर से उपलब्ध कराए गए करीब 20 से 22 लैपटॉप के कथित रूप से गायब होने की चर्चा ने विवाद को और हवा दे दी है। इसके अलावा मंदिर समिति को दान में मिली एंबुलेंस और टेंपो ट्रैवलर वाहनों के उपयोग और प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन मामलों में अब तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है।

मंदिर समिति के ऋषिकेश स्थित कैंप कार्यालय को लेकर भी आलोचना हो रही है। विरोधियों का कहना है कि जब बीकेटीसी का मुख्यालय जोशीमठ में है और ऋषिकेश में समिति की अपनी धर्मशालाएं भी उपलब्ध हैं, तब किराये के भवन में कैंप कार्यालय चलाने की आवश्यकता क्या है। उनका आरोप है कि इससे समिति पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने कपाट खुलने के बाद से अब तक प्राप्त चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। वहीं, वीआईपी दर्शन के लिए प्रति व्यक्ति 1100 रुपये शुल्क लेने की व्यवस्था भी विवादों में है। विपक्ष का आरोप है कि यदि ऐसी व्यवस्था लागू की गई थी तो इसके लिए बोर्ड की औपचारिक स्वीकृति ली जानी चाहिए थी।

उक्रांद के केंद्रीय महासचिव बीरू सजवाण का कहना है कि लगातार सामने आ रहे मामलों ने बीकेटीसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका मानना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहे। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार की जांच समिति और पुलिस जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिनसे पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

 

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