अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक बार फिर सुर्खियों में है। चंदा और दान राशि के इस्तेमाल को लेकर पहले उठे सवालों के बाद अब ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड और दान में मिली चांदी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां ट्रस्ट के उस दावे की पड़ताल कर रही हैं जिसमें कहा गया था कि दान में प्राप्त चांदी को उसकी शुद्धता जांचने और चांदी की ईंटों में बदलने के लिए हैदराबाद स्थित सरकारी कंपनी सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SPMCIL) भेजा गया था।
सूत्रों के मुताबिक, बड़ी मात्रा में चांदी को कड़ी सुरक्षा के बीच हैदराबाद ले जाने और वापस लाने में ही एक लाख रुपये से अधिक का खर्च आया। वहीं, चांदी की शुद्धता की जांच, उसे पिघलाने और चांदी की ईंटों में परिवर्तित करने की पूरी प्रक्रिया पर करीब 20 लाख रुपये खर्च हुए।
बताया जा रहा है कि नवंबर 2024 और मार्च 2025 में ट्रस्ट की बैठकों के दौरान इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी ट्रस्ट सदस्यों को दी गई थी। बैठकों में यह सुझाव भी रखा गया कि भविष्य में यदि कोई श्रद्धालु राम मंदिर परिसर में सोना-चांदी या अन्य कीमती आभूषण दान करना चाहता है और उसकी आधिकारिक रसीद चाहता है, तो इसके लिए अलग से व्यवस्थित व्यवस्था विकसित की जाए।
एक अधिकारी के अनुसार, दान में विभिन्न स्वरूपों में मिली लगभग 1,000 किलोग्राम चांदी को परीक्षण और रिफाइनिंग के लिए सरकारी मिंटिंग यूनिट भेजा गया था। जांच और पिघलाने की प्रक्रिया के बाद अशुद्धियां अलग होने से इसका शुद्ध वजन करीब 900 किलोग्राम रह गया। परीक्षण के दौरान चांदी की औसत शुद्धता लगभग 90 प्रतिशत पाई गई।
फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड, खर्च और चांदी से जुड़े सभी दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ट्रस्ट की ओर से दी गई जानकारी और वास्तविक रिकॉर्ड में कोई अंतर है या नहीं।