होर्मुज पर बनी सहमति से भारत को क्या होगा बड़ा फायदा? डोभाल ने BRICS में खोले पत्ते
डोभाल ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। इसके सामान्य संचालन से कच्चे तेल, गैस, उर्वरक, रसायन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बेहतर होगी, जिससे भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा...
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ब्रिक्स देशों की 16वीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी समझ का भारत स्वागत करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि होर्मुज जलडमरूमध्य का सुचारु रूप से खुला रहना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देगा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करने में मददगार साबित होगा।
डोभाल ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। इसके सामान्य संचालन से कच्चे तेल, गैस, उर्वरक, रसायन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बेहतर होगी, जिससे भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक समृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा।
बैठक को संबोधित करते हुए एनएसए ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया सैन्य संघर्षों, भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक चुनौतियों और तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकियों के कारण जटिल दौर से गुजर रही है। उन्होंने चिंता जताई कि विवादों के समाधान के पारंपरिक तंत्र कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं, ऐसे में ब्रिक्स देशों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
डोभाल ने कहा कि ब्रिक्स की स्थापना उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साझा मंच प्रदान करने और अधिक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समूह शांति, विकास, सहयोग और वैश्विक दक्षिण की आवाज को सशक्त बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों जैसे साइबर हमलों, आतंकवाद के बदलते स्वरूप और विघटनकारी तकनीकों को वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि इनसे निपटने के लिए सामूहिक रणनीति और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। डोभाल के अनुसार, 4.1 अरब से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला ब्रिक्स समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगभग 31.5 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देता है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रभावशीलता लगातार बढ़ रही है।