डॉलर के मुकाबले रुपया अचानक क्यों हुआ मजबूत? जानिए बाजार को मिली बड़ी राहत

मुंबई। भारतीय रुपये ने सप्ताह के पहले कारोबारी दिन मजबूत शुरुआत करते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 58 पैसे मजबूत होकर 94.60 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में यह तेजी वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के कारण देखने को मिली।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की संभावनाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनाया है। तेल की कीमतों में आई गिरावट का सीधा लाभ भारत जैसे आयातक देशों को मिलता है, क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होता है और रुपये को मजबूती मिलती है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.70 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान और मजबूत होकर 94.60 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव 95.18 प्रति डॉलर की तुलना में 58 पैसे की मजबूती को दर्शाता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह हाल के दिनों में रुपये की सबसे उल्लेखनीय बढ़तों में से एक है।

विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक शुरुआत और विदेशी निवेशकों की बढ़ती रुचि ने भी रुपये को समर्थन प्रदान किया। इसके साथ ही वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से अन्य मुद्राओं के साथ भारतीय मुद्रा को भी फायदा मिला।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो आने वाले दिनों में रुपये की स्थिति और मजबूत हो सकती है। हालांकि, निवेशकों की नजर अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बनी रहेगी, जो मुद्रा बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

फिलहाल, रुपये की इस मजबूती को भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे आयात लागत में कमी आने के साथ-साथ मुद्रास्फीति पर भी कुछ हद तक नियंत्रण मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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