नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते की खबरों का कांग्रेस ने स्वागत किया है, लेकिन इसके साथ ही केंद्र की मोदी सरकार की आर्थिक और विदेश नीति पर तीखा हमला भी बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) बिना किसी बाधा के खुला रहता है, तो इससे भारत को निश्चित रूप से राहत मिलेगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका, ईरान और इजरायल इस समझौते का पूरी तरह पालन करेंगे। हालांकि, जयराम रमेश ने कहा कि इससे यह नहीं माना जाना चाहिए कि भारतीय अर्थव्यवस्था की सभी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। उनके अनुसार, देश की आर्थिक चुनौतियां पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध से पहले से ही मौजूद थीं।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि भारतीय रुपया लंबे समय से दबाव में है और डॉलर की मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक के दौरान निवेश की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी, जबकि वास्तविक मजदूरी में भी ठहराव देखा गया है।
जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर चीन से बढ़ते आयात को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसके कारण भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। साथ ही, कर विभाग और जांच एजेंसियों को मिली व्यापक शक्तियों ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा किया है, जिससे निवेश प्रभावित हुआ है।
विदेश नीति के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा। जयराम रमेश ने कहा कि वर्ष 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद जिस पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में भारत सफल रहा था, वह अब चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नई भूमिका हासिल करता दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे भारत की विदेश नीति के लिए गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती बताया।
इजरायल को लेकर भी कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित संतुलित और व्यावहारिक कूटनीति की मांग करते हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में अपेक्षित संतुलन दिखाने में सफल नहीं रही है।