चीन की बढ़ती चुनौती के बीच इंडोनेशिया का बड़ा कदम, भारत की ब्रह्मोस मिसाइल पर बढ़ा भरोसा

 जकार्ता। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के बीच इंडोनेशिया अपनी सैन्य ताकत को तेजी से मजबूत करने में जुट गया है। इसी रणनीति के तहत इंडोनेशिया भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी कर रहा है। साथ ही उसने दक्षिण कोरिया के अत्याधुनिक एमएसएएम-2 चियोंगुंग-2 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद प्रक्रिया को भी आगे बढ़ा दिया है।

चियोंगुंग-2, जिसे केएम-एसएएम ब्लॉक-2 के नाम से भी जाना जाता है, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली उन्नत मिसाइल प्रणाली है। इसे दुश्मन के लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन जैसे खतरों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने मई 2026 में इस प्रणाली के निर्माता एलआईजी डिफेंस एंड एयरोस्पेस को औपचारिक लेटर ऑफ इंटरेस्ट जारी किया था।

हालांकि यह पत्र अंतिम खरीद की गारंटी नहीं देता, लेकिन इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि इंडोनेशिया अपनी वायु और मिसाइल रक्षा क्षमताओं में मौजूद कमियों को दूर करना चाहता है। प्रस्तावित रक्षा पैकेज में अत्याधुनिक मल्टी-फंक्शन रडार, वर्टिकल लॉन्च सिस्टम, लॉन्चर वाहन, लॉजिस्टिक सपोर्ट, तकनीकी दस्तावेज और तकनीक हस्तांतरण जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इंडोनेशिया एक बहुस्तरीय एयर और मिसाइल डिफेंस नेटवर्क विकसित करना चाहता है, जो बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन और अन्य आधुनिक खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सके। मलक्का और सुंडा जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी उसके लिए बड़ी प्राथमिकता है, क्योंकि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की बाधा पूरे इंडो-पैसिफिक व्यापार नेटवर्क को प्रभावित कर सकती है।

17 हजार से अधिक द्वीपों वाले इंडोनेशिया के लिए सुरक्षा व्यवस्था चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में चियोंगुंग-2 जैसी प्रणाली उसकी रक्षा रणनीति को नई मजबूती दे सकती है। यह सिस्टम 360 डिग्री कवरेज वाले रडार और उन्नत इंटरसेप्शन तकनीक से लैस है। संयुक्त अरब अमीरात में इसने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के खिलाफ 96 प्रतिशत तक की सफलता दर हासिल की है। यही वजह है कि यह प्रणाली अब कई देशों की पसंद बनती जा रही है।

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