तेहरान। इजराइल और अमेरिका के साथ हुए सैन्य संघर्ष का असर अब ईरान की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ती महंगाई, दवाओं की कमी, उत्पादन में गिरावट और रोजगार संकट ने देश को गंभीर आर्थिक चुनौतियों के बीच ला खड़ा किया है। हालात इतने कठिन हो गए हैं कि कई परिवारों की मासिक आय महीने के मध्य तक ही समाप्त हो रही है और उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों का सामान उधार या किस्तों पर खरीदना पड़ रहा है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार युद्ध के बाद आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। कुकिंग ऑयल की कीमतों में 430 प्रतिशत, अंडों में 345 प्रतिशत, चावल में 287 प्रतिशत और दूध के दामों में 139 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। राजधानी तेहरान सहित इस्फहान, अहवाज और मशहद जैसे प्रमुख शहरों में लोग अब बमबारी से ज्यादा बढ़ती महंगाई और भविष्य की अनिश्चितता को लेकर चिंतित हैं।
तेहरान के एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी ने बताया कि उन्होंने अपने मोहल्ले की दुकान से उधार राशन लिया था, लेकिन अगले ही दिन भुगतान करने पहुंचे तो सामान की कीमत लगभग दोगुनी हो चुकी थी। ऐसे अनुभव अब देश के कई हिस्सों में आम होते जा रहे हैं।
युद्ध के शुरुआती दौर में कुछ लोगों को उम्मीद थी कि हालात जल्द सामान्य हो जाएंगे, लेकिन अमेरिका की सक्रिय भागीदारी के बाद संघर्ष लंबा खिंचता गया। इसके चलते आम नागरिकों का ध्यान अब राजनीतिक बदलाव से हटकर शांति, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर केंद्रित हो गया है।
युद्ध का असर औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ा है। मशहद के पास स्थित कई फैक्ट्रियों में कच्चे माल की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है और कर्मचारियों को अस्थायी अवकाश पर भेजा गया है। वहीं, इजराइली हमलों के कारण पेट्रोकेमिकल उद्योग को भी नुकसान पहुंचा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि कई दवाएं सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और फार्मेसियों को नियंत्रित वितरण करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने चिकित्सकों को केवल अत्यावश्यक दवाएं लिखने की सलाह दी है। हीमोफीलिया जैसे गंभीर रोगों की दवाओं का भंडार तेजी से घट रहा है, जबकि आयात में भी बाधाएं बनी हुई हैं।
युद्ध और आर्थिक संकट के दोहरे दबाव ने ईरान के आम नागरिकों के सामने अभूतपूर्व मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।