खाड़ी में कोहराम: Trump की डांट और ईरान का पलटवार
मिडिल ईस्ट में ट्रम्प की सख्ती और धधकती जंग : मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य आक्रामकता के कारण अमेरिका और ईरान के बीच चल रही पर्दे के पीछे की शांति वार्ता टूटने की कगार पर पहुंच गई है...हालांकि ट्रम्प का दावा है कि हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच एक अस्थायी और नाजुक समझौता हो गया है, लेकिन लगातार होते हमलों ने पूरे क्षेत्र को भीषण युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है...
चाणक्य मंत्र डेस्क।
मिडिल ईस्ट में बारूद का ढेर कभी भी बड़ा धमाका कर सकता है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच की तनातनी अब आर-पार की लड़ाई में बदल चुकी है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही शांति वार्ता उस वक्त खतरे में पड़ गई जब इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए। इस क्षेत्रीय उबाल को शांत करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बेहद कड़क और तीखे लहजे में फोन पर बात की। सूत्रों के मुताबिक, ट्रम्प ने नेतन्याहू को साफ चेतावनी दी कि इजरायल की यह सैन्य आक्रामकता अमेरिका के शांति प्रयासों को पूरी तरह तबाह कर रही है। ट्रम्प के भारी दबाव के बाद ही इजरायल ने बेरूत पर अपना बड़ा सैन्य हमला रोकने का फैसला किया है।
कूटनीति के इस तनाव के बीच समुद्र में युद्ध की आग भड़क उठी है। इराक के उम्म कसर बंदरगाह के पास अरब खाड़ी में एक कमर्शियल कार्गो जहाज ‘एमएससी सरिस्का वी’ पर अज्ञात मिसाइल या ड्रोन से भीषण हमला हुआ। जहाज के दाहिने हिस्से में हुए इस जोरदार धमाके ने अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी गलियारे में दहशत फैला दी है। ईरान और उसके समर्थक गुटों ने अमेरिकी हमलों के जवाब में इस क्षेत्र में नए मोर्चे खोलने और होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने की धमकी दी है। एक तरफ जहां ट्रम्प दावा कर रहे हैं कि उनके दखल से युद्धविराम की राह आसान होगी, वहीं जमीनी हकीकत इसके उलट है। ईरान के नए नेतृत्व और इजरायल के अड़ियल रुख के कारण इस पूरे क्षेत्र में पूर्ण सैन्य टकराव की आशंका बनी हुई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।