देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की आहट तेज हो गई है। उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने राज्य आंदोलनकारियों से नए आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है। गुरुवार को कचहरी स्थित शहीद स्मारक में आयोजित बैठक में उन्होंने सरकार पर आंदोलनकारियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।
बैठक में बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे। इस दौरान धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण के लिए मुख्यमंत्री द्वारा निर्धारित छह माह की समय सीमा अब समाप्त होने जा रही है, लेकिन अभी भी कई मामलों का निस्तारण नहीं हो पाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस अवधि को छह माह और बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलनकारी फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
बैठक के बाद आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन नेगी के नेतृत्व में जिलाधिकारी आदेश चौहान से मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण में हो रही देरी और उनके बच्चों को 10 प्रतिशत आरक्षण के तहत सरकारी नौकरियों में नियुक्ति न मिलने पर नाराजगी जताई।
धीरेंद्र प्रताप ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, लेकिन आंदोलनकारियों की समस्याओं को सुनने के लिए सरकार के पास समय नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री को आंदोलनकारी विरोधी बताते हुए कहा कि राज्य निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले लोगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
वहीं, जगमोहन नेगी ने कहा कि नए जिलाधिकारी से उन्हें सकारात्मक उम्मीदें हैं, लेकिन यदि 15 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जून के तीसरे सप्ताह में मुख्यमंत्री का घेराव किया जाएगा। जिलाधिकारी आदेश चौहान ने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि लंबित मामलों में जल्द कार्रवाई की जाएगी और चिन्हीकरण की समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।