बालाघाट। सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल से जुड़ा मामला अब सिर्फ मेडिकल लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है। पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और राजनीतिक संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि अस्पताल की कथित लापरवाही के बाद भी मुख्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, जबकि एक होम्योपैथिक डॉक्टर को आरोपी बनाकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, युवक विवेक तिरपुड़े अस्पताल में उपचार के बाद कोमा में पहुंच गया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं। सूत्रों का दावा है कि अस्पताल का ऑन रिकॉर्ड संचालन वीरेश्वर सिंह के नाम पर है, लेकिन अस्पताल के लेटर पैड में बीएचएमएस डॉक्टर हितेश कावड़े को संचालक और प्रबंधक बताया गया। इसी आधार पर पुलिस ने डॉ. कावड़े के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
मामले में सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा एलोपैथिक उपचार किए जाने के आरोप लगे हैं। नियमों के अनुसार बीएचएमएस डॉक्टर एलोपैथिक पद्धति से इलाज नहीं कर सकते, ऐसे में यह मामला गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है। जांच में एनेस्थीसिया से जुड़े डॉक्टरों के साथ डॉ. कावड़े का नाम भी सामने आया है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि अस्पताल प्रबंधन को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण अब तक अस्पताल का पंजीयन निरस्त नहीं किया गया। वहीं, सरदार पटेल विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों और पूर्व सीएमएचओ डॉ. मनोज पांडे के करीबी संबंधों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पूर्व में अस्पताल और नर्सिंग कॉलेज को मिली अनुमतियों में नियमों की अनदेखी की गई थी।
अब इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों की मांग है कि निष्पक्ष जांच कर असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।