होर्मुज संकट के बीच भारत का 40 हजार करोड़ का मास्टरप्लान, अब नहीं होगी गैस की कमी?

नई दिल्ली। India अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और तेल-गैस आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ओमान से सीधे भारत तक गहरे समुद्र के रास्ते गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना को आगे बढ़ा रही है। करीब 40 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को देश की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर साफ दिखाई दे रहा है। एशिया से लेकर यूरोप तक गैस और तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है, इस संकट से सीधे प्रभावित हुआ है। ऐसे में सरकार अब वैकल्पिक और सुरक्षित आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने में जुट गई है।

रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित पाइपलाइन का रूट इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि यह Oman और United Arab Emirates के रास्ते अरब सागर से होकर गुजरे और संवेदनशील भू-राजनीतिक क्षेत्रों से बचा जा सके। बताया जा रहा है कि पाइपलाइन समुद्र की सतह से करीब 3,450 मीटर की गहराई तक बिछाई जा सकती है, जिससे यह दुनिया की सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में शामिल हो सकती है।

इस परियोजना के जरिए भारत को ओमान, यूएई, Saudi Arabia, Iran, Turkmenistan और Qatar जैसे देशों के विशाल गैस भंडार तक सीधी पहुंच मिल सकेगी। इन देशों के पास संयुक्त रूप से लगभग 2,500 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस भंडार मौजूद हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब एलएनजी के स्पॉट बाजार पर अत्यधिक निर्भरता कम करना चाहता है। वर्तमान में देश में प्राकृतिक गैस की खपत करीब 190-195 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन है, जो 2030 तक बढ़कर 300 मिलियन तक पहुंच सकती है।

हालिया संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला। इसी ने भारत को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस मेगा प्रोजेक्ट पर तेजी से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।

 

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