नई दिल्ली, भारतीय रेलवे में किए गए बड़े सुधार अब माल परिवहन क्षेत्र में असर दिखाने लगे हैं। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, पिछले चार महीनों में सीमेंट की ढुलाई में 170 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी नवंबर 2025 में लागू की गई नई नीतियों और आधुनिक बल्क सीमेंट टैंक कंटेनरों के इस्तेमाल के कारण संभव हुई है।
रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने गुरुवार को कंटेनर क्षेत्र में किए गए सुधारों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को भविष्य की योजनाओं पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए। मंत्रालय का कहना है कि रेलवे अब सड़क परिवहन पर निर्भरता कम कर स्वच्छ, तेज और किफायती लॉजिस्टिक्स व्यवस्था विकसित कर रहा है।
नई प्रणाली के तहत विशेष टैंक कंटेनरों के जरिए सीमेंट सीधे उत्पादन केंद्रों से उपभोग स्थलों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे बार-बार लोडिंग और अनलोडिंग की जरूरत कम हुई है और सामग्री की बर्बादी भी घटी है। रेलवे के मुताबिक, “मेक इन इंडिया” तकनीक से तैयार ये कंटेनर ट्रेन से ट्रेलर और फिर दोबारा ट्रेन तक आसानी से परिवहन के लिए डिजाइन किए गए हैं।
इन कंटेनरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे रेडी-मिक्स कंक्रीट मशीनों के अनुकूल हैं। इससे निर्माण स्थलों तक सीमेंट सीधे उपयोग योग्य स्थिति में पहुंच रहा है। मंत्रालय का दावा है कि इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम हुई है और सप्लाई चेन पहले से अधिक तेज और प्रभावी बनी है।
रेलवे का मानना है कि इस सुधार का असर निर्माण क्षेत्र पर भी दिखाई देगा। परिवहन लागत घटने से मकान और अन्य निर्माण कार्यों की लागत कम हो सकती है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, रेल आधारित परिवहन से प्रदूषण और ईंधन खपत में भी कमी आएगी।
सीमेंट परिवहन में मिली सफलता के बाद रेलवे अब फ्लाई ऐश परिवहन पर फोकस बढ़ाने जा रहा है। रेल मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाली फ्लाई ऐश को ईंट उद्योग, सीमेंट फैक्ट्रियों और निर्माण स्थलों तक पहुंचाने में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए।