नेपाल ने भारत से क्यों मांगी मदद? दो अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को लेकर बड़ा फैसला

काठमांडू। नेपाल सरकार ने अपने दो नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के पूर्ण संचालन के लिए भारत के साथ जल्द कूटनीतिक बातचीत शुरू करने का फैसला लिया है। सरकार का मानना है कि भारत की विमानन कंपनियों के सहयोग से पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा और गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा को पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जा सकता है।

नेपाल सरकार की ओर से यह घोषणा प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह सरकार की पहली नीति एवं कार्यक्रम प्रस्तुति के दौरान की गई। संसद के बजट सत्र के पहले दिन आयोजित दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने सरकार की नीतियों और योजनाओं को सार्वजनिक किया।

सरकार ने कहा कि विदेशी ऋण की सहायता से बनाए गए पोखरा और गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अभी तक अपेक्षित संख्या में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं हो सकी हैं। इससे इन एयरपोर्ट्स की संचालन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। नेपाल को उम्मीद है कि भारतीय एयरलाइंस यदि इन दोनों हवाई अड्डों से नियमित अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय उड़ानें शुरू करती हैं, तो इनके संचालन को बड़ी मजबूती मिलेगी।

नीति एवं कार्यक्रम में स्पष्ट किया गया कि नेपाल सरकार भारत के साथ तत्काल कूटनीतिक संवाद शुरू करेगी, ताकि विभिन्न भारतीय शहरों से सीधी उड़ानों की संख्या बढ़ाई जा सके। सरकार का मानना है कि इससे न केवल पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि व्यापार, निवेश और दोनों देशों के बीच संपर्क भी मजबूत होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल के इन नए एयरपोर्ट्स का बेहतर संचालन दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से भी अहम साबित हो सकता है। भारत और नेपाल के बीच पहले से ही मजबूत सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हैं, ऐसे में हवाई संपर्क बढ़ने से दोनों देशों को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।

नेपाल सरकार अब इन दोनों अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को आर्थिक रूप से व्यवहारिक और व्यस्त एयर हब बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

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