नई दिल्ली। भारत की समुद्री ताकत को और मजबूती देते हुए स्वदेशी युद्धपोत INS Mahendragiri को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है। यह अत्याधुनिक युद्धपोत पूरी तरह देश में निर्मित है और ‘मेक इन इंडिया’ व ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
इस युद्धपोत का निर्माण Mazagon Dock Shipbuilders Limited ने किया है। यह नीलगिरि-श्रेणी के फ्रिगेट्स का छठा पोत है, जिसे आधुनिक तकनीक और उन्नत युद्ध प्रणाली से लैस किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टेल्थ क्षमता है, जिससे यह दुश्मनों के रडार से आसानी से बच सकता है।
Stealth Technology के जरिए तैयार इस युद्धपोत को इस तरह डिजाइन किया गया है कि समुद्र में इसकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि यह दुश्मनों के खिलाफ रणनीतिक रूप से बेहद कारगर साबित हो सकता है।
हथियारों की बात करें तो इस युद्धपोत में लंबी दूरी तक मार करने वाली BrahMos Missile प्रणाली तैनात है, जो इसे और भी घातक बनाती है। इसके अलावा सतह से सतह पर मार करने वाली बराक मिसाइल प्रणाली, टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर भी इसमें लगाए गए हैं, जिससे यह पनडुब्बियों और अन्य खतरों से निपटने में सक्षम है।
‘महेंद्रगिरि’ न केवल तेज रफ्तार से समुद्र में लंबी दूरी तय कर सकता है, बल्कि यह कई तरह के मिशनों को एक साथ अंजाम देने में भी सक्षम है। इसकी उन्नत सेंसर प्रणाली और हथियार नौसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्धपोत के नौसेना में शामिल होने से Indian Ocean में भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। यह समुद्री सुरक्षा, निगरानी और दुश्मनों पर नजर रखने में अहम भूमिका निभाएगा।