नई दिल्ली। Rashid Alvi ने पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस नेता ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए Election Commission of India की भूमिका पर भी चिंता जताई है।
अल्वी का कहना है कि चुनाव के दौरान अनियमितताएं केवल कुछ इलाकों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि पूरे West Bengal में देखने को मिलीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने बड़े पैमाने पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित नहीं हो सका। उनके मुताबिक, करीब ढाई लाख सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद जो घटनाएं सामने आईं, वह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक हैं।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव ड्यूटी में ऐसे अधिकारियों को लगाया गया, जिनका झुकाव Bharatiya Janata Party की ओर है। उन्होंने मतगणना प्रक्रिया को लेकर भी आशंका जताई और कहा कि वहां भी पक्षपात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अल्वी ने तीखे शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा कि क्या चुनाव आयोग भाजपा का “अग्रिम संगठन” बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा किसी भी कीमत पर पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल करना चाहती है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बन सकता है।
वहीं, फाल्टा क्षेत्र में हुए विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने All India Trinamool Congress के कार्यकर्ताओं पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि टीएमसी कार्यकर्ता गड़बड़ी या हिंसा में शामिल हैं, तो वहां मौजूद चुनाव आयोग और पैरामिलिट्री बल क्या कर रहे थे।
अल्वी ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान पूरा प्रशासन चुनाव आयोग के नियंत्रण में होता है, इसलिए किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की जिम्मेदारी उसी की बनती है। इस बयान के बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।