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“अजगर पकड़ने का खौफनाक तरीका! जिंदा जानवर बनेंगे ‘जासूस’”

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अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में तेजी से बढ़ते बर्मी अजगरों के खतरे से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने एक बेहद अनोखा और चौंकाने वाला तरीका अपनाया है। इन विशालकाय सांपों ने स्थानीय वन्यजीवों की आबादी को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ता जा रहा है। अब शोधकर्ता ओपोसम नामक छोटे मार्सुपियल जानवरों की मदद से इन अजगरों का पता लगाने की योजना बना रहे हैं।

दरअसल, वैज्ञानिकों ने पाया कि ओपोसम पहले से ही अजगरों का शिकार बन रहे हैं। इसी प्राकृतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इन जानवरों को ट्रैकिंग डिवाइस के साथ जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया है। ओपोसम के गले में विशेष जीपीएस कॉलर लगाए जाएंगे। जैसे ही कोई अजगर उन्हें निगलेगा, यह ट्रैकर सक्रिय होकर वैज्ञानिकों को उस सांप की सटीक लोकेशन बताने लगेगा।

फ्लोरिडा के दलदली और घने जंगलों में 20 फीट तक लंबे बर्मी अजगरों को ढूंढना बेहद मुश्किल होता है। वे इतनी कुशलता से छिपते हैं कि अब तक रोबोटिक उपकरणों और जालों जैसे कई प्रयास भी असफल रहे हैं। ऐसे में यह नई तकनीक वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है।

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इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे विशेषज्ञों का कहना है कि पहले ट्रैकिंग डिवाइस काफी महंगे थे, लेकिन अब कम लागत वाले कॉलर विकसित कर लिए गए हैं, जिससे इस मिशन को बड़े स्तर पर लागू करना संभव हो गया है। योजना के तहत इस गर्मी के अंत तक करीब 40 ओपोसम को इस अभियान में शामिल किया जाएगा।

हालांकि, इस तरीके को लेकर कुछ नैतिक सवाल भी उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह जानवरों के साथ क्रूरता हो सकती है। लेकिन वैज्ञानिकों का तर्क है कि वे किसी नए खतरे को पैदा नहीं कर रहे, बल्कि पहले से मौजूद प्राकृतिक प्रक्रिया का उपयोग कर रहे हैं।

यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो फ्लोरिडा के जंगलों में अजगरों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण पाना आसान हो सकता है और स्थानीय वन्यजीवों को राहत मिल सकती है।

 

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