देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून स्थित सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल (एसबीपीएस) में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत एक अनोखे और प्रेरणादायक तरीके से की गई। ‘6 बनाम 60 उम्र’ थीम के तहत करीब 40 बुजुर्ग महिला-पुरुष स्कूल ड्रेस पहनकर छात्रों के साथ कक्षाओं में शामिल हुए।
ये बुजुर्ग प्रतिभागी कंधे पर बैग और हाथ में पानी की बोतल लिए सुबह स्कूल पहुंचे, जहां छात्रों ने तालियों और तिलक के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने बच्चों के साथ प्रार्थना सभा में भाग लिया और बाद में कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई का अनुभव भी लिया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को नैतिक संस्कार देना और यह संदेश देना था कि उम्र चाहे कोई भी हो, व्यक्ति हमेशा सक्रिय और सीखने के लिए तैयार रह सकता है।
बलूनी ग्रुप के एमडी विपिन बलूनी ने बताया कि इस कार्यक्रम के जरिए दो पीढ़ियों को एक मंच पर लाकर बच्चों को जीवन के मूल्यों और अनुभवों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का अनुभव बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
इस मौके पर नए छात्रों का भी पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया और उन्हें स्कूल की विभिन्न गतिविधियों और स्पोर्ट्स अकादमियों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता और अर्जुन अवार्डी पदम बहादुर मल्ल उपस्थित रहे। उन्होंने छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी जरूरी हैं।
विशेष अतिथि पूर्व डीएसपी दिनेश ढौंडियाल ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे बच्चों को अपने बुजुर्गों से सीखने का अवसर मिला है। कार्यक्रम के दौरान बुजुर्ग प्रतिभागियों ने गढ़वाली भाषा में भी पढ़ाई की और अपने अनुभव साझा किए।
इस अनूठी पहल ने न केवल छात्रों को प्रेरित किया, बल्कि समाज में यह संदेश भी दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।