देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत 21 जर्जर प्राथमिक विद्यालयों के पुनर्निर्माण और सुधारीकरण के लिए 3.52 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस संबंध में विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सके।
सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसी उद्देश्य के तहत उन विद्यालयों को चिन्हित किया गया है, जिनके भवन जर्जर या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और जहां तत्काल सुधार की आवश्यकता है। इस योजना के अंतर्गत विशेष रूप से राजकीय प्राथमिक विद्यालयों को शामिल किया गया है।
स्वीकृत विद्यालय चार जनपदों—पिथौरागढ़, देहरादून, ऊधमसिंह नगर और अल्मोड़ा—में स्थित हैं। इन विद्यालयों में भवनों का पुनर्निर्माण, छत और फर्श की मरम्मत, चारदीवारी निर्माण तथा अन्य आवश्यक कार्य किए जाएंगे। इसके लिए पेयजल निगम, ग्रामीण निर्माण विभाग और मंडी परिषद को कार्यदायी संस्थाएं नामित किया गया है।
ऊधमसिंह नगर में चंदेली थारू और महुआखेड़ा स्थित विद्यालयों के लिए लाखों रुपये की स्वीकृति दी गई है। पिथौरागढ़ जिले में भी कई विद्यालयों को इस योजना में शामिल किया गया है, जहां तिलढुकरी, गोलमान, बोराबुंगा, कुनिया, किम्टा, कवाधार, ख्वांकोट, सूनी, कमतोली, नारायणनगर और भड़गांव जैसे विद्यालयों में विभिन्न निर्माण कार्य किए जाएंगे।
देहरादून जिले में तुनवाला-2, आराघर-2, नालापानी धोबीघाट, जोहड़ी, चांदपुर सहित कई विद्यालयों के भवनों के सुधार और पुनर्निर्माण के लिए बजट स्वीकृत किया गया है। इसके अलावा राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालयों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। वहीं अल्मोड़ा जिले के लामासिंह विद्यालय में भी मरम्मत कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है।
इसके अतिरिक्त पिथौरागढ़ के डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री घोषणा के तहत बंदरलीमा प्राथमिक विद्यालय के भवन मरम्मत के लिए भी अलग से धनराशि मंजूर की गई है।
विद्यालय शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि जर्जर विद्यालय भवनों का पुनर्निर्माण सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल से न केवल विद्यालयों के बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, बल्कि छात्रों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण भी मिलेगा।
सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद है।