देहरादून। प्रदेश में लंबित भूमि विवादों के त्वरित निस्तारण और आम लोगों को घर बैठे न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘राजस्व लोक अदालत’ अभियान का शुभारंभ किया। इस पहल को ‘न्याय आपके द्वार’ अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार न्याय व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि राजस्व से जुड़े विवाद केवल कानूनी प्रक्रियाएं नहीं होते, बल्कि इनके साथ किसानों की भूमि, परिवारों की आजीविका और लोगों का आत्मसम्मान जुड़ा होता है। इसलिए इन मामलों का समयबद्ध समाधान अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में वर्तमान समय में 400 से अधिक राजस्व न्यायालय कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 50 हजार से अधिक प्रकरण लंबित हैं। इन लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण एवं संतुष्टि’ के मूल मंत्र के साथ ‘राजस्व लोक अदालत’ की शुरुआत की गई है।
उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर राजस्व परिषद, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त न्यायालय, जिला स्तर पर कलेक्टर न्यायालय तथा तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार न्यायालय कार्य कर रहे हैं। अब इस नई पहल के माध्यम से इन सभी स्तरों पर मामलों की सुनवाई और निस्तारण को और अधिक तेज एवं प्रभावी बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र की भावना को आगे बढ़ाता है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी योजनाओं और न्याय व्यवस्था का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरलता और शीघ्रता से पहुंचे।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि राजस्व लोक अदालत के माध्यम से वर्षों से लंबित भूमि विवादों का समाधान तेज गति से होगा और आम नागरिकों को अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी।