देहरादून। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) से लोक भवन में भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रेटेजिक मंच के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट कर समकालीन वैश्विक और राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में विशेष रूप से साइबर अपराध, आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में थिंक टैंक के वरिष्ठ पूर्व सैन्य अधिकारी और रणनीतिक विशेषज्ञ शामिल हुए, जिन्होंने वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और उनके भारत पर संभावित प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत किया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि आज के समय में पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ साइबर हमले, सूचना युद्ध और आर्थिक दबाव भी वैश्विक संघर्ष का हिस्सा बन चुके हैं।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने विशेषज्ञों के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में सुरक्षा की परिभाषा भी बदल रही है। उन्होंने कहा कि नीति-निर्माताओं के लिए ऐसे मंच अत्यंत उपयोगी हैं, क्योंकि इनसे जमीनी अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण एक साथ मिलते हैं, जो भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होते हैं।
इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित सैन्य और कूटनीतिक विशेषज्ञ मौजूद रहे, जिनमें श्याम सरन, लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह, ए. जी. थपलियाल और अरविंद वर्मा शामिल थे। इनके अलावा कई सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर, मेजर जनरल और विषय विशेषज्ञों ने भी चर्चा में अपने विचार साझा किए।
बैठक के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी प्रभुत्व जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में साइबर अपराध और डिजिटल जासूसी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन सकते हैं। इसलिए देश को अपनी साइबर सुरक्षा संरचना को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि ऐसे संवाद और बौद्धिक विमर्श न केवल रणनीतिक सोच को दिशा देते हैं, बल्कि प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र को भी नई चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं।
यह बैठक राज्य और केंद्र स्तर पर सुरक्षा नीतियों के लिए महत्वपूर्ण सुझावों का आधार बन सकती है और भविष्य की रणनीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।