आपदा प्रबंधन बैठक में बड़ा निर्देश: नदियों के बदलते मिजाज का वैज्ञानिक अध्ययन होगा अनिवार्य

देहरादून:  राज्य में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं और नदी कटान की घटनाओं को देखते हुए मुख्य सचिव  आनन्द बर्द्धन  ने नदियों के व्यवहार और प्रवाह पैटर्न के वैज्ञानिक अध्ययन को अत्यंत आवश्यक बताया है। सचिवालय में आयोजित राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक में उन्होंने आपदा प्रबंधन से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

बैठक राज्य आपदा मोचन निधि और राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के अंतर्गत प्राप्त प्रस्तावों के अनुमोदन के लिए आयोजित की गई थी। विभिन्न जनपदों से आए प्रस्तावों को समिति ने सिद्धांततः मंजूरी प्रदान की। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि भविष्य में सभी प्रस्ताव जिला स्तरीय समिति की संस्तुति के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से ही राज्य स्तर पर भेजे जाएं, ताकि प्रस्तावों की गुणवत्ता और प्राथमिकता सुनिश्चित हो सके।

मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को नदियों की ड्रेजिंग और माइनिंग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ सुरक्षा से संबंधित सभी परियोजनाएं पहले विभागीय समिति और तकनीकी सलाहकार समिति की समीक्षा के बाद ही राज्य कार्यकारिणी समिति के समक्ष लाई जाएं।

उन्होंने उन नदियों को चिन्हित करने के निर्देश भी दिए, जहां हर वर्ष कटान और बाढ़ से नुकसान हो रहा है। ऐसी नदियों के लिए दीर्घकालिक समाधान के रूप में चैनलाईजेशन योजना तैयार करने पर जोर दिया गया। विशेष रूप से  सितारगंज क्षेत्र की बैगुल नदी के प्रवाह और कटान का विस्तृत अध्ययन कराने के निर्देश भी दिए गए, ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन, पूर्व तैयारी और दीर्घकालिक योजनाओं के माध्यम से जोखिम को कम करना ही वास्तविक समाधान है। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे और विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

 

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