देहरादून: स्कूल वैन चालकों के कथित उत्पीड़न और आर्थिक समस्याओं को लेकर उत्तराखंड स्कूल वैन एसोसिएशन के नेतृत्व में बुधवार को गांधी पार्क में सैकड़ों चालक एकत्र हुए। बैठक का नेतृत्व एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सचिन गुप्ता ने किया।
बैठक में सचिन गुप्ता ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा सभी चालकों की पहली प्राथमिकता है और इसके लिए हर चालक को परिवहन विभाग के नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी चालक अपने वाहनों के कागजात अद्यतन रखें तथा वैन में फर्स्ट एड किट और अग्निशमन सिलेंडर अनिवार्य रूप से मौजूद हो। इसके अलावा प्रत्येक वाहन में बच्चों की नामावली, अभिभावकों के फोन नंबर और पते स्पष्ट रूप से चस्पा होने चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क किया जा सके।
बैठक के दौरान चालकों ने अपनी आर्थिक परेशानियों को भी खुलकर सामने रखा। उनका कहना था कि वैन संचालन से जुड़े खर्च—जैसे परिवहन विभाग को पूरे वर्ष का टैक्स, परमिट शुल्क, बीमा प्रीमियम, बैंक ऋण की किस्तें और निजी खर्च—सभी 12 महीने चलते हैं। ऐसे में केवल 10 या 11 महीने की फीस से गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। इसी कारण अभिभावकों से 12 महीने का शुल्क लेना उनकी मजबूरी बन जाता है।
चालकों ने कहा कि वे बच्चों की सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं, लेकिन लगातार बढ़ते खर्च और प्रशासनिक दबाव के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो संगठन आगे और बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा।
इस अवसर पर गगन ढींगरा, विपिन जोशी, पवन पासवान, सुमित कश्यप, अनूप कुमार सहित बड़ी संख्या में चालक और पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए सभी ने अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए संगठित रहने का संकल्प लिया।