साहिया। सरदार महिपाल राजेंद्र जनजातीय पीजी कॉलेज, साहिया की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा विकासखंड कालसी के ग्राम ककाड़ी में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के चौथे दिन “परम्परागत औषधीय ज्ञान एवं ग्रामीण स्वास्थ्य” विषय पर विशेष प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जौनसार-बावर क्षेत्र में पाए जाने वाले औषधीय पौधों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना और स्वयंसेवकों तथा ग्रामीणों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी वरुण प्रसाद सेमवाल द्वारा अतिथियों के स्वागत के साथ की गई। इस अवसर पर समाजसेवी और जड़ी-बूटी विशेषज्ञ अमर सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने जौनसार-बावर क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न औषधीय वनस्पतियों के महत्व और उनके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
अमर सिंह चौहान ने कहा कि जौनसार-बावर के पहाड़ी क्षेत्रों में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि इन पौधों का संरक्षण किया जाए और वैज्ञानिक तरीके से इनका उपयोग बढ़ाया जाए तो यह क्षेत्र आयुर्वेदिक औषधियों के उत्पादन और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। उन्होंने तुलसी, नीम, गिलोय, हल्दी, अदरक, आंवला, सतावर, पथरचट्टा, एलोवेरा, भकुम्भरा और कालाभांसा जैसे कई औषधीय पौधों के गुणों और उनके पारंपरिक उपयोग के बारे में भी विस्तार से बताया।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि ग्राम ककाड़ी की श्रीमती केशो देवी ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वे वर्षों से पारंपरिक ज्ञान के आधार पर ग्रामीणों का उपचार करती आ रही हैं। उन्होंने चिंता जताई कि आधुनिकता और वनों की कटाई के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में कई औषधीय पौधे धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं, इसलिए इनके संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
इस अवसर पर गृह विज्ञान विभाग की प्राध्यापिका डॉ. प्रियंका जलाल ने भारतीय पारंपरिक खानपान और मोटे अनाज जैसे जौ, बाजरा, ज्वार और रागी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संतुलित और मौसमी भोजन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
कार्यक्रम में डॉ. रेनू देवी, नरेश चौहान, वीरेंद्र सिंह बिष्ट, गुड्डी देवी सहित कई गणमान्य व्यक्ति और एनएसएस स्वयंसेवक उपस्थित रहे।