देहरादून, संघ शताब्दी हिमालयन कल्चरल सेंटर के प्रेक्षागृह में पूर्व सैनिकों और पूर्व सेना अधिकारियों के साथ आयोजित विशेष संवाद गोष्ठी के प्रश्नोत्तर सत्र में डॉ मोहन भागवत ने विभिन्न राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
राष्ट्रीय सुरक्षा और अग्निवीर योजना से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना को एक प्रयोग के रूप में लागू किया गया है और इसका पहला बैच जल्द ही बाहर आने वाला है। उन्होंने सुझाव दिया कि अनुभव के आधार पर इस योजना में सुधार की गुंजाइश पर विचार होना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सक्षम और उत्कृष्ट नेतृत्व को उन्होंने अनिवार्य बताया।
विचारधारा, धर्म और हिंदू पहचान पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में डॉ. भागवत ने कहा कि भारतीय दृष्टि “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना से प्रेरित है। उनके अनुसार धर्म समाज को धारण करने वाला तत्व है और हिंदू विचारधारा उदार है, जिसमें बिना परिवर्तन के भी कोई व्यक्ति शामिल हो सकता है।
क्षेत्रीय रणनीतिक मुद्दों पर उन्होंने नेपाल, बांग्लादेश और कश्मीर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संपूर्ण कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पड़ोसी देशों को भारत के साथ सहयोगात्मक संबंध बनाए रखना चाहिए, क्योंकि बड़े वैश्विक शक्ति संतुलन में यह उनके हित में है।
सामाजिक समरसता और सोशल मीडिया पर बढ़ती कटुता के विषय में उन्होंने संवाद और शास्त्रार्थ की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि मंदिर, पानी और श्मशान जैसे सार्वजनिक संसाधन सभी हिंदुओं के लिए समान रूप से खुले होने चाहिए।
भ्रष्टाचार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने इसे केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि “नियत” का प्रश्न बताया। उन्होंने चरित्र निर्माण, बचत और समाजहित में योगदान की भावना को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।
समान नागरिक संहिता को उन्होंने राष्ट्रीय एकात्मता का साधन बताया और आरक्षण जैसे मुद्दों पर व्यापक सामाजिक सहमति की आवश्यकता जताई।