सबरीमाला मामले पर फिर होगी ऐतिहासिक सुनवाई, 9 जजों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से करेगी शुरुआत

नई दिल्ली। महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश से जुड़े बहुचर्चित मामलों पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक सुनवाई होने जा रही है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा कि 9 जजों की संविधान पीठ 7 अप्रैल 2026 से अंतिम सुनवाई शुरू करेगी। इस पीठ के गठन की घोषणा भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जाएगी।

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने स्पष्ट किया कि यह मामला धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े व्यापक संवैधानिक प्रश्नों को संबोधित करेगा। इसमें केरल स्थित सबरीमाला मंदिर से जुड़े फैसले की समीक्षा भी शामिल है।

गौरतलब है कि पूर्व निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी। इस फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र ने समीक्षा याचिका का समर्थन किया है।

अदालत ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे 14 मार्च या उससे पहले अपनी लिखित दलीलें दाखिल करें। सुनवाई की समय-सारिणी भी तय कर दी गई है। 7 से 9 अप्रैल तक समीक्षा याचिकाकर्ताओं और उनका समर्थन करने वालों की दलीलें सुनी जाएंगी, जबकि 14 से 16 अप्रैल तक समीक्षा का विरोध करने वाले पक्षों को सुना जाएगा।

सुनवाई को सुव्यवस्थित बनाने के लिए अदालत ने वकील कृष्णा कुमार सिंह को समीक्षा याचिकाकर्ताओं की ओर से नोडल काउंसल नियुक्त किया है, जबकि विरोधी पक्ष के लिए शाश्वती परी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वरिष्ठ वकील के. परमेश्वर के साथ शिवम सिंह को एमीकस क्यूरी नियुक्त किया गया है, जो सभी पक्षों के रुख को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

यह सुनवाई धार्मिक स्वतंत्रता, लैंगिक समानता और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर देश की नजरें टिकाए हुए है।

 

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