लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान **वित्त मंत्री सुरेश खन्ना** ने वर्ष **2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट** सदन के पटल पर रखी। रिपोर्ट में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में हुए व्यापक सुधारों, निवेश और उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया।
आर्थिक सर्वे के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में **चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 46,728.48 करोड़ रुपये** का प्रावधान किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। यह स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। इस बजट के माध्यम से अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, मेडिकल कॉलेजों, स्वास्थ्य अवसंरचना और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूती दी जा रही है।
आर्थिक सर्वे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट *“स्टेट फाइनेंस: ए स्टडी ऑफ बजट ऑफ 2025-26”* का हवाला देते हुए बताया गया कि उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य बजट कुल बजट का **6.1 प्रतिशत** है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार अन्य राज्यों की तुलना में स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक निवेश कर रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य व्यय में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे आम नागरिकों के **आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर** में उल्लेखनीय कमी आई है। सरकारी निवेश बढ़ने से अब इलाज, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाएं आम लोगों की पहुंच में आई हैं।
आर्थिक सर्वे में यह भी उल्लेख किया गया कि सरकार की योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव से **संस्थागत प्रसव** में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में जहां 34.74 लाख संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए थे, वहीं वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर **41 लाख** तक पहुंच गई। कुल प्रसवों में से **96.12 प्रतिशत संस्थागत** रहे। इसके विपरीत, गैर-संस्थागत प्रसव की संख्या 3.35 लाख से घटकर **1.66 लाख** रह गई, जो 50 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्शाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि सरकार की योजनाबद्ध नीतियों, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम की सक्रिय भूमिका तथा स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच का प्रत्यक्ष परिणाम है।