देहरादून। प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने पंचायत भूमि पर अवैध कब्ज़ों और अतिक्रमण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पंचायतों की भूमि पर जहां भी कब्ज़े या अतिक्रमण की स्थिति है, उसे तत्काल चिन्हित कर हटाया जाए। मंत्री ने कहा कि पंचायत की भूमि ग्रामीण विकास की अमूल्य धरोहर है और इस पर किसी भी तरह का अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं होगा।
शनिवार को सहस्त्रधारा रोड, डंडा लखौंड स्थित पंचायतीराज निदेशालय में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान सतपाल महाराज ने पंचायतीराज विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने पंचायतों के लैंड बैंक की स्थिति का आकलन करने तथा भूमि से संबंधित अद्यतन रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।
बैठक में मंत्री ने 73वें संविधान संशोधन के तहत संविधान की 11वीं अनुसूची में शामिल 29 विषयों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन विषयों से संबंधित निधियों, कार्यों और कार्मिकों का त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को हस्तांतरण शीघ्रता से सुनिश्चित किया जाए, ताकि पंचायतें आत्मनिर्भर बन सकें और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में तेजी आए।
सतपाल महाराज ने 15वें वित्त आयोग से राज्य को प्राप्त धनराशि की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक उत्तराखंड को 15वें वित्त आयोग के तहत कुल 2813 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इसमें 1182.6 करोड़ रुपये टाइड फंड और 1630.4 करोड़ रुपये अनटाइड फंड के रूप में शामिल हैं। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस धनराशि का उपयोग पारदर्शी और प्रभावी तरीके से किया जाए, ताकि पंचायत स्तर पर बुनियादी सुविधाओं और विकास योजनाओं को मजबूती मिल सके।
बैठक के दौरान पंचायतीराज विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते, पंचायत निदेशक निधि यादव, संयुक्त निदेशक रविनाथ रमन त्रिपाठी, हिमाली जोशी पेटवाल, अपर निदेशक मनोज तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री ने सभी अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता दें और पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।