गणतंत्र दिवस पर DRDO का शक्ति प्रदर्शन: हाइपरसोनिक मिसाइल से दुश्मन के रडार भी बेबस

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने देश की रक्षा शक्ति का भव्य और तकनीकी प्रदर्शन किया। इस दौरान डीआरडीओ की झांकी और सशस्त्र बलों की टुकड़ियों में कई अत्याधुनिक स्वदेशी रक्षा प्रणालियां प्रदर्शित की गईं, जिन्होंने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

परेड में सबसे खास आकर्षण रही **लंबी दूरी की स्वदेशी एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल**, जिसे लॉन्चर के साथ प्रदर्शित किया गया। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन की गई है। यह हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल स्थिर और चलते हुए दोनों प्रकार के लक्ष्यों पर सटीक हमला करने में सक्षम है और विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जा सकती है।

यह अपनी श्रेणी की पहली स्वदेशी मिसाइल है, जिसमें पूरी तरह देश में विकसित एवियोनिक्स सिस्टम और उच्च सटीकता वाले सेंसर लगाए गए हैं। यह मिसाइल क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी पर उड़ान भरती है, जिसकी शुरुआती गति मैक-10 तक होती है और यह कई बार स्किप करते हुए औसतन मैक-5 की गति बनाए रखती है। कम ऊंचाई पर तेज रफ्तार और अत्यधिक मैनूवरेबिलिटी के कारण दुश्मन के रडार इसे ट्रैक नहीं कर पाते।

डीआरडीओ की झांकी की थीम **‘कॉम्बैट सबमरीन के लिए नेवल टेक्नोलॉजी’** रही, जिसे 26 से 31 जनवरी तक लाल किले पर आयोजित भारत पर्व में भी प्रदर्शित किया जाएगा। झांकी में इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सूट, वायर गाइडेड हैवी वेट टॉरपीडो और एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को दर्शाया गया।

एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन प्रणाली स्वदेशी फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल सेल पर आधारित है, जो सबमरीन को लंबे समय तक बिना सतह पर आए चुपचाप संचालन करने में सक्षम बनाती है। इससे सबमरीन की स्टेल्थ क्षमता और युद्धक प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाती है।

इसके अलावा परेड में अर्जुन मेन बैटल टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, नाग मिसाइल, एडवांस्ड टोइड आर्टिलरी गन सिस्टम और बैटलफील्ड सर्विलांस रडार भी प्रदर्शित किए गए।
डीआरडीओ द्वारा विकसित ये स्वदेशी रक्षा प्रणालियां आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी उपलब्धि हैं।

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