किशोर न्याय अधिनियम के तहत बाल संरक्षण कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

देहरादून। बाल संरक्षण के क्षेत्र में गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से **देहरादून जिला बाल संरक्षण इकाई** और महिला कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड ने एक दिवसीय **प्रशिक्षण कार्यशाला** का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी **सविन बंसल** के निर्देशानुसार जिला प्रोबेशन अधिकारी और बाल संरक्षण टीम ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यशाला में **चाइल्ड हेल्पलाइन 1098** और राज्य/स्वैच्छिक बाल गृहों में कार्यरत कार्मिकों ने भाग लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य था **किशोर न्याय अधिनियम 2015 (संशोधन 2021)** के अंतर्गत पंजीकृत बाल गृहों में निवासरत **अनाथ, परित्यक्त, दिव्यांग और अभ्यर्पित बच्चों** की देखभाल और उनके साथ कार्मिकों के व्यवहार और आचरण को बेहतर बनाना। इसके अलावा, **नवजात शिशुओं की देखभाल**, मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन और बाल कल्याण मानकों के अनुरूप सेवाओं का प्रशिक्षण भी दिया गया।

कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर **डॉ. मंजू राणा** और **पीएम माउंटेन चिल्ड्रन फाउंडेशन** के सुधीर भट्ट ने बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया। साथ ही, विधि अधिकारी **समीक्षा शर्मा**, क्लीनिक साइकोलॉजिस्ट **पूजा शर्मा**, और प्रोग्राम प्रबंधक **प्रीति उपाध्याय** ने कानूनी, मनोवैज्ञानिक और प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया।

इस प्रशिक्षण में लगभग **120 बाल गृह कार्मिक और चाइल्ड हेल्पलाइन कर्मी** उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम के दौरान बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने और बाल संरक्षण प्रथाओं में सुधार करने के लिए ज्ञान और कौशल प्राप्त किया।

जिला बाल संरक्षण इकाई की अध्यक्ष **नमिता ममगई** ने कहा कि इस पहल से कर्मचारियों में **बाल सुरक्षा, देखभाल और अधिकारों के प्रति जागरूकता** बढ़ेगी। जिलाधिकारी सविन बंसल ने भी सभी कर्मियों को बच्चों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की और आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस दिशा में लगातार सहयोग करती रहेगी।

इस प्रशिक्षण कार्यशाला से देहरादून में बाल संरक्षण सेवाओं में सुधार और बच्चों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है।

 

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