सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
आइजोल। म्यांमार सीमा से लगे मिजोरम राज्य में रविवार को एक ऐतिहासिक पल दर्ज हुआ, जब रेल मार्ग से पहली बार कारों की बड़ी खेप साइरंग स्टेशन पहुंची। गुवाहाटी के पास चांग्सारी से आईं 119 मारुति कारें न सिर्फ राज्य की सड़कों पर नई रफ्तार देंगी, बल्कि इससे जुड़ी घटना मिजोरम के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
भारतीय रेलवे की इस पहल से आइजोल में वाहनों की उपलब्धता बढ़ेगी, लंबी सड़क यात्राओं पर निर्भरता कम होगी और ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े डीलरों, सर्विस प्रोवाइडरों तथा ग्राहकों को सीधा फायदा पहुंचेगा।
यह सफलता बैरबी-साइरंग रेल लाइन की बदौलत संभव हुई है, जो मिजोरम के लिए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर माइलस्टोन है। चुनौतीपूर्ण इलाकों से गुजरते हुए बनी यह 51.38 किलोमीटर लंबी लाइन 45 सुरंगों से होकर गुजरती है और राज्य को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने में रणनीतिक भूमिका निभा रही है। इस लाइन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल 13 सितंबर को किया था। इससे मिजोरम पूरी तरह से भारत के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ गया।
यात्रियों की प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है। ये तीनों ट्रेनें भारी मांग के साथ चल रही हैं।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा से हासिल जानकारी के मुताबिक साइरंग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस 147 फीसदी ऑक्यूपेंसी के साथ, साइरंग-गुवाहाटी मिजोरम एक्सप्रेस 115 फीसदी और साइरंग-कोलकाता एक्सप्रेस 139 फीसदी ऑक्यूपेंसी के साथ चल रही हैं।
यात्री इन ट्रेनों को सुविधाजनक, किफायती और समय बचाने वाली बता रहे हैं। रेल कनेक्टिविटी ने प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों तक पहुंच आसान बना दी है, साथ ही पड़ोसी राज्यों में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच में भी सुधार हुआ है। अब यह मार्ग सीमेंट, निर्माण सामग्री, ऑटोमोबाइल, रेत और पत्थर के चिप्स जैसी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई का माध्यम बन चुका है। 17 सितंबर से 12 दिसंबर तक कुल 17 रेक हैंडल किए गए हैं। ये विकास दर्शाते हैं कि यह लाइन एक विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के रूप में उभर रही है, जो परिवहन लागत कम कर मिजोरम की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को मजबूत बना रही है।