हरिद्वार में होने वाले अर्द्ध कुंभ की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में तेरहों अखाड़ों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन आवाहन अखाड़े के प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल नहीं होने दिया गया। प्रशासनिक रवैये से नाराज़ संतों ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार कर रोष जताया है।
जानकारी के अनुसार, मेला अधिकारी सोनिका ने प्रत्येक अखाड़े से दो प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलावा भेजा था। आवाहन अखाड़े के महंत सत्य गिरी महाराज शहर से बाहर थे, इसलिए उनकी जगह महंत गोपाल गिरी महाराज और थानापति सत्यनारायण गिरी बैठक में शामिल होने पहुंचे। उन्हें पुलिस एस्कॉर्ट के साथ बैठक स्थल तक भी ले जाया गया, लेकिन प्रवेश द्वार पर उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि आधिकारिक सूची में उनके नाम दर्ज नहीं हैं।
आवाहन अखाड़े के संतों का आरोप है कि यह सब जानबूझकर किया गया। महंत गोपाल गिरी महाराज ने दावा किया कि बैठक में मौजूद हरिगिरी ने उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जताई, जिसके बाद उन्हें बाहर कर दिया गया। संतों का कहना है कि जब सभी अखाड़ों को आमंत्रण भेजा गया था, तो उनके प्रतिनिधियों को बाहर करने का क्या औचित्य है?
इस घटनाक्रम के बाद आवाहन अखाड़े के संतों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह संत समाज के सम्मान का मुद्दा है और प्रशासन को इसका जवाब देना होगा। घटना के चलते अर्द्ध कुंभ की तैयारियों और अखाड़ों के बीच समन्वय पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।