असम विधानसभा ने पारित किया बहु विवाह निषेध विधेयक

दोषी को 7 से 10 साल तक की जेल, सरकारी नौकरी और चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध
सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
गुवाहाटी।असम विधानसभा ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए ‘असम बहु विवाह निषेध विधेयक-2025’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा द्वारा पेश इस विधेयक के माध्यम से राज्य में बहु विवाह को पूरी तरह गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया है। यह कानून हिंदू, मुस्लिम सहित सभी धर्मों और समुदायों पर समान रूप से लागू होगा।

विधानसभा में करीब चार घंटे चली तीखी बहस के बाद विधेयक पारित हुआ। विपक्षी दल एआईयूडीएफ और सीपीआई(एम) ने कई संशोधन प्रस्ताव पेश किए, लेकिन सभी को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया।

महिलाओं की रक्षा और समानता का मजबूत कदम : सीएम

विधेयक पेश करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा ने कहा, “यह विधेयक किसी धर्म या समुदाय विशेष के विरुद्ध नहीं है। यह केवल और केवल महिलाओं के सम्मान, गरिमा और समान अधिकारों की रक्षा करने का प्रयास है। बहु विवाह प्रथा महिलाओं पर सबसे बड़ा अत्याचार है और इससे बाल विवाह व कम उम्र में मातृत्व जैसी समस्याएं भी बढ़ती हैं।”

उन्होंने कहा कि यदि 2026 के विधानसभा चुनाव में जनता फिर भाजपा नीत सरकार को चुनेगी तो पहले सत्र में ही असम में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी जाएगी।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

– पहली शादी जीवित रहते दूसरी शादी करना या बहुविवाह को बढ़ावा देना दंडनीय अपराध।
– सजा : न्यूनतम 7 वर्ष से लेकर अधिकतम 10 वर्ष तक का कठोर कारावास तथा जुर्माना।
– पीड़ित महिला को 1 लाख से 1.40 लाख रुपये तक मुआवजा।
– दोषी व्यक्ति को सरकारी नौकरी, सरकारी योजनाओं के लाभ तथा विधानसभा/लोकसभा चुनाव लड़ने से आजीवन अयोग्य घोषित किया जाएगा।
– पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार।
– छूट : छठी अनुसूची वाले क्षेत्र और आदिवासी समुदायों की परंपरागत प्रथाएं इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगी।

विपक्ष का विरोध

विपक्षी दलों ने विधेयक को “एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला” बताया। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा, “यह कानून सभी धर्मों पर एक समान लागू होगा। हिंदू हों या मुस्लिम, कोई भी बहुविवाह नहीं कर सकेगा। यह लिंग न्याय और महिला सशक्तीकरण की दिशा में क्रांतिकारी कदम है।”

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि असम देश का पहला राज्य बन गया है जिसने बहु विवाह पर इतना कड़ा और व्यापक कानून बनाया है। यह विधेयक देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, “असम अब बहुविवाह-मुक्त राज्य बनेगा। यह हमारी माताओं-बहनों-बेटियों के सम्मान की जीत है।”

अब राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह कानून पूरे असम में लागू हो जाएगा।

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