मणिपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का तीन दिवसीय दौरा शुरू, जातीय हिंसा के बाद पहली यात्रा; विभिन्न समुदायों के नेताओं से मुलाकात

सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
इंफाल।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत गुरुवार को मणिपुर पहुंच गए हैं। मई 2023 में मेइतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा के बाद यह उनकी राज्य की पहली यात्रा है। तीन दिवसीय इस दौरे को संघ के शताब्दी समारोह का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें वे नागरिकों, उद्यमियों, जनजातीय नेताओं, युवाओं और सिविल सोसाइटी के प्रमुख सदस्यों से अलग-अलग मुलाकातें करेंगे।
डॉ. भागवत आज सुबह इंफाल हवाई अड्डे पर पहुंचे। आगमन के दिन वे इंफाल के कोन्जेंग लेइकाई में उद्यमियों और प्रमुख नागरिकों के साथ बैठक कर रहे हैं। 21 नवंबर को वे पहाड़ी जिलों के जनजातीय नेताओं से संवाद करेंगे, जबकि दौरे के दौरान युवा नेताओं और प्रभावशाली नागरिकों के साथ अलग सत्र आयोजित होंगे। डॉ. भागवत 22 नवंबर को राज्य से प्रस्थान करेंगे।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मणिपुर लंबे समय से जातीय तनाव का सामना कर रहा है। मई 2023 से अब तक हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। फरवरी 2025 में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है।

संघ सूत्रों के अनुसार, डॉ. भागवत की यात्रा मुख्य रूप से संगठनात्मक और शताब्दी समारोह से जुड़ी है, जिसमें सामाजिक सद्भाव, युवा जागरण और सांस्कृतिक पहल पर जोर दिया जाएगा। आरएसएस का मणिपुर में सक्रिय सेवा कार्य जारी है, जहां स्वयंसेवक विभिन्न समुदायों के लिए राहत और सामाजिक कार्यों में लगे हुए हैं।

डॉ. भागवत की यह यात्रा राज्य में शांति और समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि संघ हमेशा से विविधता में एकता को भारतीय समाज की मूल ताकत मानता रहा है।राज्य में शांति बहाली की दिशा में चल रहे प्रयासों के बीच यह दौरा राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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