After Header-1

विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ ने हरिद्वार में हिंदी विद्वानों को किया सम्मानित, गूँजी सरस्वती वंदना से सभा!

ब्रह्माकुमारी बीके मंजू, डॉ. आनंद भारद्वाज और डॉ. श्रीगोपाल नारसन को मिला 'भारत गौरव सम्मान' — जानिए समारोह की खास बातें!

300×250 ADS-1

हरिद्वार। विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर (बिहार) द्वारा आयोजित **वार्षिक अधिवेशन और सम्मान समारोह** का भव्य आयोजन उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के ऑडिटोरियम में किया गया। इस अवसर पर हिंदी साहित्य, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को **‘भारत गौरव’** और **सारस्वत सम्मान** से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन उपकुलसचिव **डॉ. प्रेमचंद पांडेय** ने किया, जबकि समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि **राज्य मंत्री श्यामवीर सैनी**, विशिष्ट अतिथि **राजयोगिनी बीके मंजू दीदी**, **संस्कृत शिक्षा निदेशक डॉ. आनंद भारद्वाज**, कुलपति **डॉ. दयानंद जायसवाल**, उपकुलपति **डॉ. श्रीगोपाल नारसन**, और **प्रो. सतेंद्र भाई** (माउंट आबू, ब्रह्माकुमारी मुख्यालय) सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया।

**गीतकार अनिल अमरोही** ने अपनी सरस्वती वंदना और विद्यापीठ के कुलगीत से माहौल को भक्तिभाव से भर दिया। स्वागत भाषण में **डॉ. आनंद भारद्वाज** ने कहा कि “संस्कृत भाषाओं की जननी है और हिंदी उसकी प्रतिभाशाली पुत्री। विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ वर्षों से हिंदी की अलख जगा रहा है और साहित्यकारों को प्रोत्साहित कर रहा है।”

इस अवसर पर आर्मी स्कूल रुड़की की प्रवक्ता शिखा शर्मा द्वारा लिखित तीन पुस्तकों — ‘आत्म मंथन’, ‘श्रीगोपाल काव्यधारा में अध्यात्म’* और ‘दादी और विभव’ — का विमोचन भी किया गया।

300×600 ADS-2

**उपकुलपति डॉ. श्रीगोपाल नारसन** ने अपने संबोधन में कहा कि “मां गंगा के तट पर हिंदी के साधकों को सारस्वत सम्मान मिलना अत्यंत सुखद है।” उन्होंने ब्रह्माकुमारीज संस्था की आध्यात्मिक सेवा और भाईचारे के कार्यों की भी सराहना की।

मुख्य अतिथि **श्यामवीर सैनी** ने विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ को “भारत का गौरव” बताया, जबकि **बीके मंजू दीदी** ने राजयोग की विधा के माध्यम से “आत्म स्वरूप में रहकर परमात्मा से जुड़ने” का संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में एक **कवि सम्मेलन** का भी आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत रुड़की के वरिष्ठ कवि **सुरेंद्र कुमार सैनी** ने अपनी ग़ज़ल से की। कार्यक्रम में देहरादून, छत्तीसगढ़, करनाल, और मुजफ्फरनगर से आए अनेक साहित्यकारों और विद्वानों ने सहभागिता की।

सभा में डॉ. विनोद बब्बर, कुंवर राज आस्थाना, वंदना गोपाल शर्मा, सविता वर्मा, घनश्याम गुप्ता, अशोक शर्मा आर्य, बीके सुशील भाई, बीके मीना दीदी, आर.पी. भारद्वाज, प्रदीप डबराल सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.