प्रधानमंत्री **नरेन्द्र मोदी** ने सोमवार को देशवासियों को **महर्षि वाल्मीकि जयंती** की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) और अपने व्हाट्सऐप चैनल पर कहा कि महर्षि वाल्मीकि के सात्विक और आदर्श विचारों का समाज पर गहरा प्रभाव रहा है और उनके संदेश **सामाजिक समरसता और सद्भाव** को सदैव आलोकित करते रहेंगे।
महर्षि वाल्मीकि को **संस्कृत भाषा का प्रथम कवि (आदिकवि)** और **हिन्दू महाकाव्य रामायण के रचयिता** के रूप में जाना जाता है। किंवदंती के अनुसार, वाल्मीकि का पूर्व नाम **रत्नाकर** था, जो अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए राहगीरों को लूटते थे। एक दिन उन्होंने **नारद मुनि** को लूटने की कोशिश की, लेकिन उनके उपदेशों से उनका जीवन बदल गया।
नारद ने उन्हें **‘राम’ का नाम जपने** की सलाह दी। वर्षों की तपस्या के दौरान उनके शरीर के चारों ओर दीमक का टीला बन गया, जिसे संस्कृत में **‘वाल्मीक’** कहा जाता है — इसी से उनका नाम **वाल्मीकि** पड़ा।
कहा जाता है कि एक बार उन्होंने गंगा तट पर एक **क्रौंच पक्षी** को शिकारी द्वारा मारे जाते देखा और उनके मुख से जो श्लोक निकला, वही संस्कृत का पहला श्लोक बना। इसी प्रेरणा से उन्होंने **भगवान राम के जीवन पर आधारित रामायण** की रचना की और उन्हें **महर्षि एवं आदिकवि** की उपाधि मिली।