सूरत। गुजरात के सूरत स्थित नई सिविल अस्पताल में 29 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. हर्ष पंड्या की आत्महत्या के मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। जांच के दौरान रैगिंग से जुड़ी शिकायतें सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने चार सीनियर डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर चारों डॉक्टरों को छह माह के लिए निलंबित कर दिया गया है। इस अवधि में उन्हें अस्पताल और पीजी हॉस्टल परिसर में प्रवेश के साथ-साथ सभी तरह की शिक्षण एवं शैक्षणिक गतिविधियों से भी दूर रखा गया है।
मूल रूप से अरवल्ली जिले के मोडासा निवासी डॉ. हर्ष सुभाषचंद्र पंड्या सूरत सरकारी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर थे। वह नई सिविल अस्पताल परिसर स्थित बॉयज पीजी हॉस्टल में रहते थे। 9 अगस्त की सुबह जब वह ड्यूटी पर नहीं पहुंचे तो एक सीनियर डॉक्टर ने उन्हें फोन किया। मोबाइल बंद मिलने पर साथी रेजिडेंट डॉक्टर को उनके कमरे पर भेजा गया। दरवाजा अंदर से बंद था। काफी प्रयास के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो सुरक्षा कर्मचारियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया। कमरे के अंदर डॉ. हर्ष मृत अवस्था में मिले।
घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन और खटोदरा पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने मेडिकल कॉलेज के डीन और अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए।
डॉ. हर्ष के पिता सुभाषचंद्र पंड्या के मुताबिक, उनका बेटा कभी-कभी सीनियरों से होने वाली परेशानी का जिक्र करता था। हालांकि वह इसे बड़ी समस्या नहीं बताता था। डॉ. हर्ष ने इसी साल फरवरी में माइक्रोबायोलॉजी विभाग में दाखिला लिया था। उनकी सगाई हो चुकी थी और दिसंबर में शादी प्रस्तावित थी।
पुलिस ने मोबाइल फोन और लैपटॉप कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। एफएसएल टीम ने भी हॉस्टल के कमरे से संभावित साक्ष्य जुटाए हैं। वहीं, उच्चस्तरीय समिति ने प्रथम वर्ष के नौ रेजिडेंट डॉक्टरों और उनके परिवारों के बयान दर्ज किए। रात 8:30 बजे से सुबह 4 बजे तक चली जांच में सीनियर रेजिडेंट, फैकल्टी, टेक्नीशियन और सफाईकर्मियों से भी पूछताछ की गई। पुलिस अब रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना के आत्महत्या से संभावित संबंधों की जांच कर रही है।